12 साल एकांतवास में गुजारेंगे जापानी भिक्षु, शुरू की बौद्ध परंपरा की सबसे कठिन तपस्या

जापान के बौद्ध भिक्षु सोगाकू तागुची ने माउंट हीई के मंदिर में 12 साल के कठोर एकांतवास की शुरुआत की है. इस दौरान वह बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे रहेंगे.

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Sagar Bhardwaj

आध्यात्मिक साधना और आत्म-नियंत्रण की राह आसान नहीं होती, लेकिन जापान के एक बौद्ध भिक्षु ने त्याग और साधना की ऐसी मिसाल पेश की है जो हर किसी को हैरान कर देगी. 31 वर्षीय जापानी बौद्ध भिक्षु सोगाकू तागुची (Sogaku Taguchi) ने 12 साल लंबे एकांतवास (Total Isolation) की कठिन शुरुआत की है.

सितंबर 2038 तक चलने वाली इस तपस्या के दौरान वह न तो किसी इंसान से मिलेंगे, न ही उन्हें बाहरी दुनिया की किसी भी गतिविधि की जानकारी होगी.

माउंट हीई के एनरियाकुजी मंदिर में साधना

सोगाकू तागुची प्राचीन जापानी शहर क्योटो के उत्तर-पूर्व में स्थित माउंट हीई के ऐतिहासिक एनरियाकुजी मंदिर (Enryakuji Temple) के परिसर में खुद को सीमित रखेंगे. उनका मुख्य उद्देश्य तेंदाई बौद्ध धर्म (Tendai Buddhism) के संस्थापक 'साइचो' के समाधि स्थल (मज़ार) की देखभाल करना है.


इस कठिन साधना को पूरा करने के बाद भिक्षु को 'जिशिन' (Jishin) की उपाधि मिलती है, जिसका अर्थ होता है 'सच्चा रक्षक' या 'सच्चा दर्शक'.

दिन की शुरुआत से रात तक कठोर दिनचर्या

यह 12 साल का सफर सिर्फ अकेले रहने का नहीं है, बल्कि इसमें शारीरिक और मानसिक सहनशक्ति की भी कड़ी परीक्षा होगी:

भोजन की तैयारी: भिक्षु को हर दिन तड़के सूरज उगने से पहले उठकर भोजन पकाना होगा और उसे समाधि स्थल पर अर्पित करना होगा.
3,000 बार नमन (Prostrations): प्रतिदिन घंटों मंत्रोच्चार करते हुए उन्हें बुद्ध की प्रतिमा के सामने 3,000 बार दंडवत प्रणाम करना होगा.
कम नींद और ध्यान: लगातार शारीरिक परिश्रम और मंत्रोच्चार के कारण उन्हें रात में सिर्फ कुछ घंटे सोने का मौका मिलेगा.
साफ-सफाई: मंदिर परिसर में एक पत्ता भी गिरा रहने की इजाजत नहीं होती. साफ-सफाई को भी 'जेन मेडिटेशन' का हिस्सा माना जाता है.

हाड़ कंपा देने वाली ठंड और जान का जोखिम

माउंट हीई पर सर्दियों के दौरान कड़ाके की ठंड और बर्फबारी होती है. यह साधना इतनी खतरनाक और कठिन होती है कि 12 साल पूरे होने से पहले ही कई भिक्षुओं की बीमारियों से मौत हो चुकी है. साल 1699 से अब तक केवल 117 भिक्षु ही इस कठिन परीक्षा को सफलतापूर्वक पूरा कर पाए हैं. सोगाकू तागुची इस सूची में 118वें स्थान पर हैं.

तपस्या शुरू करने से पहले तागुची ने कहा, 'गुरु साइचो की शिक्षाओं पर चलने की मेरी इच्छा हमेशा से थी. आज जब मैं इस साधना की शुरुआत कर रहा हूं, तो मेरा दिल अपार खुशी और उत्साह से भरा हुआ है.'