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कहीं आप भी तो नहीं खा रहे जहरीला पपीता? बीमार पड़ने से पहले जान लें पहचानने का तरीका

गर्मियों में पपीता पेट के लिए वरदान है, लेकिन बाजार में रसायनों से पके फल सेहत बिगाड़ सकते हैं. रंग, गंध, स्पर्श और पानी के टेस्ट के जरिए असली पपीते की पहचान कर आप गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: भीषण गर्मी के दिनों में पपीता शरीर को हाइड्रेटेड रखने और पाचन तंत्र को दुरुस्त करने के लिए सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है. हालांकि, आधुनिक बाजार में ज्यादा मुनाफा कमाने की होड़ में पपीतों को रसायनों के जरिए पकाया जा रहा है. ये फल देखने में तो आकर्षक और पके हुए लगते हैं, पर असल में ये कैल्शियम कार्बाइड जैसे खतरनाक रसायनों से भरे होते हैं. इनसे बचना इसलिए जरूरी है क्योंकि ये जहर समान फल आपकी सेहत के लिए अत्यंत खतरनाक साबित हो सकते हैं.

प्राकृतिक रूप से पका पपीता हल्का पीला या नारंगी रंग का होता है और उस पर कहीं-कहीं हरे धब्बे दिखना सामान्य है. इसके विपरीत, केमिकल से पकाया गया पपीता जरूरत से ज्यादा चमकदार और चटख पीला नजर आता है. रसायनों के कारण इसकी बाहरी परत पर दाग-धब्बे बहुत कम होते हैं, जो इसके अप्राकृतिक होने का पहला बड़ा संकेत है. यदि पपीता देखने में कृत्रिम रूप से सुंदर और एक ही रंग का लगे, तो उसे खरीदने से पहले सावधानी बरतना बहुत जरूरी है.

खुशबू का जादुई असर

असली और कुदरती तौर पर पके हुए पपीते की पहचान उसकी खुशबू से की जा सकती है. जब आप प्राकृतिक पपीते के डंठल वाले हिस्से को सूंघेंगे, तो वहां से हल्की मीठी और फ्रूटी महक आएगी. वहीं, केमिकल से पके पपीते में अक्सर कोई महक नहीं होती या फिर उसमें से काफी तेज और दवाओं जैसी आर्टिफिशियल गंध आती है. फल खरीदते समय डंठल वाले हिस्से को सूंघने का यह छोटा सा प्रयास आपको रासायनिक जहर के सेवन से सुरक्षित रख सकता है.

छूने पर बनावट का फर्क

पपीते को हल्का सा दबाकर देखना भी पहचान का एक प्रभावी तरीका है. प्राकृतिक रूप से पका फल हर जगह से एक समान थोड़ा नर्म महसूस होता है, लेकिन वह पूरी तरह पिचकता नहीं है. इसके उलट, रसायनों से पका पपीता बाहर से तो बहुत मुलायम लग सकता है, लेकिन वह अंदर से काफी सख्त निकलता है. अगर पपीता कहीं से बहुत ज्यादा नरम और कहीं से एकदम पत्थर जैसा सख्त महसूस हो, तो समझ जाइए कि उसे पकाने के लिए रसायनों के साथ छेड़छाड़ की गई है.

पानी में डूबने का घरेलू टेस्ट

एक बड़े बर्तन में पानी भरकर उसमें पपीता डाल दें. कुदरती तौर पर पका हुआ पपीता ठोस और वजन में भारी होता है, जिसके कारण वह पानी में पूरी तरह नीचे बैठ जाएगा. लेकिन अगर पपीता पानी की सतह पर तैरने लगे, तो यह एक बड़ी चेतावनी है. अक्सर वजन बढ़ाने या जल्दी पकाने के लिए इस्तेमाल किए गए रसायन फल के घनत्व को बदल देते हैं, जिससे वह पानी में हल्का होकर ऊपर तैरने लगता है. यह टेस्ट सबसे विश्वसनीय माना जाता है.

डंठल और सतह पर गौर करें

खरीदते समय पपीते के डंठल और उसकी ऊपरी त्वचा पर गहराई से नजर डालें. नेचुरल पपीते का डंठल धीरे-धीरे सूखने लगता है. वहीं, रसायनों का इस्तेमाल होने पर डंठल के पास अक्सर सफेद पाउडर जैसा जमाव दिखता है, जो सीधे तौर पर कैल्शियम कार्बाइड का संकेत हो सकता है. हमेशा याद रखें कि सावधानी ही सुरक्षा है. बाजार में थोड़ा सतर्क रहकर ही आप शुद्ध और पौष्टिक फलों का चुनाव कर सकते हैं, जो आपके शरीर को ऊर्जा देंगे न कि नुकसान.