दिल शरीर का सबसे अहम अंग है, जो ऑक्सीजन और पोषक तत्वों से भरपूर खून को हर हिस्से तक पहुंचाता है. लेकिन जब दिल कमजोर पड़ने लगता है, तो शरीर धीरे-धीरे संकेत देने लगता है.
अक्सर लोग इन लक्षणों को थकान या उम्र का असर मानकर टाल देते हैं. मेटाबॉलिक डॉक्टर सुधांशु राय के अनुसार, ये शुरुआती संकेत समय रहते पहचान लिए जाएं तो गंभीर हृदय रोगों से बचा जा सकता है.
जब दिल मस्तिष्क तक पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त खून नहीं पहुंचा पाता, तो चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होना आम है. कभी-कभी इसके साथ धुंधला दिखना भी हो सकता है. अगर यह समस्या बार-बार या हल्की गतिविधि के दौरान भी हो रही है, तो इसे कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
रात में बार-बार नींद खुलना, सांस फूलना, खांसी आना या बार-बार पेशाब के लिए उठना दिल की कमजोरी का संकेत हो सकता है. लेटने पर शरीर में तरल पदार्थ ऊपर की ओर शिफ्ट होता है, जिससे दिल पर दबाव बढ़ता है और सांस लेने में परेशानी होती है.
सीने में भारीपन, दबाव या कसाव महसूस होना दिल तक खून की आपूर्ति कम होने का संकेत हो सकता है. यह एंजाइना या हार्ट अटैक की शुरुआती चेतावनी भी हो सकती है. हल्का या रुक-रुक कर होने वाला दर्द भी गंभीर हो सकता है, इसलिए किसी भी तरह के सीने के दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
अगर सीढ़ियां चढ़ने, थोड़ी दूरी चलने या घरेलू काम करने में पहले से ज्यादा थकान महसूस हो रही है, तो यह दिल की पंपिंग क्षमता कम होने का संकेत हो सकता है. इसे एक्सरसाइज इंटॉलरेंस कहा जाता है और यह हार्ट फंक्शन कमजोर होने का शुरुआती लक्षण माना जाता है.
कम समय में 2 से 3 किलो वजन बढ़ना फैट नहीं बल्कि शरीर में पानी जमा होने का संकेत हो सकता है. इसके साथ टखनों, पैरों या पैरों के निचले हिस्से में सूजन दिखे तो सतर्क हो जाना चाहिए. यह तब होता है जब दिल कमजोर होकर खून को सही से पंप नहीं कर पाता.
Disclaimer यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.