खर्राटे हैं खतरनाक! फिट होने के बावजूद भी कम उम्र में आ सकता है हार्ट अटैक; जानें डॉक्टर ने क्या बताए इसके उपाय

डॉक्टर अदिति शर्मा के अनुसार रात में खर्राटे लेना कम उम्र में भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकता है. समय रहते जांच और सावधानी से दिल की गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है.

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नई दिल्ली: कम उम्र में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के बीच एक डॉक्टर ने रात की एक आम लेकिन खतरनाक गलती को लेकर चेतावनी दी है. आंतरिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉक्टर अदिति शर्मा के अनुसार खर्राटे लेना केवल नींद की समस्या नहीं है, बल्कि यह दिल के लिए गंभीर खतरे का संकेत हो सकता है.

उन्होंने बताया कि 20 और 30 की उम्र में भी अगर व्यक्ति स्वस्थ दिखता है, तब भी यह आदत हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ा सकती है. डॉक्टर अदिति ने सोशल मीडिया पर एक 29 वर्षीय युवक का मामला साझा किया. 

क्या तेज खर्राटे लेना है खतरनाक?

उन्होंने बताया कि यह युवक पूरी तरह फिट था, जिम जाता था और किसी बीमारी से ग्रस्त नहीं था. उसकी एकमात्र समस्या यह थी कि वह रात में तेज खर्राटे लेता था. परिवार और दोस्त इसे सामान्य मानते थे और मजाक भी करते थे. युवक खुद भी इसे गंभीर नहीं समझता था.

डॉक्टर ने क्या बताया?

डॉक्टर के अनुसार खर्राटों का मतलब है कि सोते समय बार बार सांस की नली का बंद होना. हर बार सांस रुकने से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिरता है. इससे अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. इन उतार चढ़ाव के कारण दिल को सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है.

यह प्रक्रिया हर रात दोहराई जाती है और धीरे धीरे दिल को नुकसान पहुंचाती है. डॉक्टर अदिति का कहना है कि यही कारण है कि आजकल कम उम्र के लोग भी हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं. उन्होंने साफ कहा कि यह केवल तनाव या मोबाइल फोन की वजह से नहीं हो रहा है. शरीर जो सबसे तेज चेतावनी दे रहा है, लोग उसे नजरअंदाज कर रहे हैं और वह चेतावनी है खर्राटे.

डॉक्टर ने क्या दी सलाह?

डॉक्टर ने सलाह दी कि अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से खर्राटे लेता है तो उसे इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि समय रहते सावधानी बरतने से भविष्य में गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है. 

क्या है इसका उपाय?

डॉक्टर ने कुछ जरूरी उपाय भी बताए. उन्होंने कहा कि सबसे पहले खर्राटों की जांच करानी चाहिए. सोने की पोजीशन को सुधारना जरूरी है. अधिक वजन होने पर वजन कम करना चाहिए. साथ ही स्लीप एपनिया की जांच भी करानी चाहिए. नेशनल हार्ट लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट के अनुसार स्लीप एपनिया एक गंभीर स्थिति है.

अगर सोते समय सांस लेने में बार -बार रूकावट आती है. इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती. इसलिए डॉक्टर से समय पर सलाह लेना बेहद जरूरी है.