शेखपुरा: पिता के निधन के बाद परिवार पर आई मुश्किलों ने इन तीन बहनों की राह जरूर कठिन कर दी, लेकिन उनका हौसला नहीं तोड़ सकीं. बिहार के शेखपुरा जिले के लोहान गांव की शिखा, पूजा और मानसी ने सीमित साधनों के बीच पढ़ाई जारी रखी. मां सीता देवी ने बेटियों को आगे बढ़ाने में पूरी ताकत लगा दी. बड़ी बेटी ने खुद पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया और आगे बढ़ने का रास्ता बनाया.
इन तीनों बहनों की कहानी इसलिए खास है, क्योंकि पढ़ाई के साथ उन्हें परिवार की जिम्मेदारियों का भी सामना करना पड़ा. शिखा जब महज 6 साल की थीं, तभी पिता संजय सिंह का निधन हो गया. वह किसान और राशन डीलर थे. पिता के जाने के बाद घर की जिम्मेदारी मां पर आ गई. मां ने बड़ी बेटी को मैट्रिक तक पढ़ाया. इसके बाद शिखा ने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और अपनी पढ़ाई भी जारी रखी.
शिखा ने दिन में बच्चों को पढ़ाया और अपने लिए पढ़ाई का समय निकाला. ट्यूशन से मिले पैसों से उन्होंने अपनी शिक्षा का खर्च संभाला और समाजशास्त्र में ऑनर्स की डिग्री हासिल की. साल 2016 में उनकी शादी हुई. शादी के बाद घर संभालने और दो बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी भी आई. पति आनंद कुमार उस समय नौकरी में नहीं थे, लेकिन शिखा ने पढ़ाई का सिलसिला नहीं छोड़ा.
शिखा को ससुराल से भी पढ़ाई के लिए सहयोग मिला. घर के काम और बच्चों की देखभाल के बाद जो समय मिलता, उसमें वह परीक्षा की तैयारी करती थीं. लगातार मेहनत के बाद शिखा ने बीपीएससी टीआरई-3 परीक्षा में सफलता हासिल की और सरकारी शिक्षक बनीं. उनके पति आनंद कुमार भी केंद्रीय विद्यालय पटना में शिक्षक हैं. इस तरह दोनों ने अपने-अपने संघर्ष के बीच शिक्षक बनने का मुकाम हासिल किया.
शिखा की शादी के बाद छोटी बहनें पूजा और मानसी ने भी गांव के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया. इसी कमाई से उन्होंने अपनी पढ़ाई का खर्च निकाला. पूजा ने इतिहास में ऑनर्स किया, जबकि मानसी ने केमिस्ट्री में ऑनर्स की डिग्री हासिल की. पूजा की शादी 2019 में कुमार पंकज से हुई. दो बच्चों की मां बनने के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और बीपीएससी टीआरई-1 में सफलता पाई. उनके पति भी सरकारी शिक्षक हैं.
सबसे छोटी बहन मानसी की शादी इंजीनियर विकास कुमार से हुई. एक बच्चे की मां बनने के बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी. ससुराल से मिले सहयोग और लगातार मेहनत के दम पर मानसी ने भी बीपीएससी टीआरई-1 परीक्षा पास कर ली. इस तरह शिखा, पूजा और मानसी तीनों सरकारी शिक्षक बन गईं. उनकी जिंदगी बताती है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, मेहनत और परिवार का साथ रास्ता बदल सकता है.