Inspiring Journey: पटवारी की नौकरी, 4 घंटे की पढ़ाई और तीन बार की नाकामी… संजय परमार फिर ऐसे बने MP SI में नंबर-1
शाजापुर के किसान परिवार से आने वाले संजय परमार ने सरकारी नौकरी मिलने के बाद अपने बड़े लक्ष्य को नहीं छोड़ा. पटवारी की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने रोजाना करीब चार से पांच घंटे पढ़ाई की और सोशल मीडिया, बेवजह की बातचीत तथा घूमने-फिरने से दूरी बनाए रखी.
Inspiring Journey: शाजापुर के केवड़ाखेड़ी गांव के संजय परमार के लिए सरकारी नौकरी मंजिल नहीं, बल्कि एक पड़ाव थी. किसान परिवार से निकले संजय पटवारी बने, लेकिन बचपन से खाकी पहनने का सपना उनके भीतर बना रहा. बड़े भाई के सेना में होने से वर्दी और देशसेवा के प्रति उनका आकर्षण और मजबूत हुआ. पटवारी की ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों को कानून-व्यवस्था संभालते देख यह सपना और गहरा हो गया. इसके बाद उन्होंने नौकरी के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी.
संजय की राह आसान नहीं रही. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के शुरुआती दौर में उन्हें JEE एडवांस्ड में असफलता मिली. इसके बाद उन्होंने MPPSC की तैयारी की और तीन बार इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन तीनों मौकों पर अंतिम चयन नहीं हो सका. लगातार मिली नाकामियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई बंद नहीं की.
पटवारी बने, लेकिन खाकी का सपना नहीं छोड़ा
संजय फिलहाल पटवारी के पद पर काम कर रहे हैं. नौकरी मिलने के बाद आसपास के लोगों ने उन्हें सलाह दी कि अब सरकारी नौकरी मिल चुकी है, इसलिए आगे पढ़ाई करने की जरूरत नहीं है. मगर संजय का लक्ष्य इससे आगे था. वह पटवारी की जिम्मेदारी निभाते हुए पुलिस सेवा में जाना चाहते थे. बड़े भाई के सेना में होने के कारण वर्दी से जुड़ा आकर्षण पहले से था और नौकरी के दौरान पुलिस की भूमिका को करीब से देखने पर उनका लक्ष्य और स्पष्ट होता गया.
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तीन बार MPPSC इंटरव्यू, फिर भी नहीं मिली मंजिल
संजय की सफलता के पीछे कई असफल प्रयास छिपे हैं. JEE एडवांस्ड में सफलता नहीं मिली तो उन्होंने MPPSC की तैयारी शुरू की. तीन बार वह इंटरव्यू चरण तक पहुंचे, लेकिन हर बार अंतिम सूची में जगह बनाने से चूक गए. लगातार असफल होने के बावजूद उन्होंने इसे तैयारी खत्म करने की वजह नहीं बनने दिया. उन्होंने SI भर्ती परीक्षा की तैयारी को नए तरीके से आगे बढ़ाया.
ड्यूटी के बाद शुरू होती थी पढ़ाई की दूसरी पारी
पटवारी की नौकरी और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी एक साथ संभालना आसान नहीं था. संजय ने अपनी ड्यूटी को व्यवस्थित किया और रोजाना करीब चार से पांच घंटे पढ़ाई के लिए निकाले. सुबह ड्यूटी से पहले और रात में काम पूरा होने के बाद वह किताबों के साथ समय बिताते थे. उन्होंने सोशल मीडिया, बेवजह की बातचीत और घूमने-फिरने से दूरी बना ली.
595.98 अंक के साथ मेरिट में सबसे ऊपर नाम
MP पुलिस SI और सूबेदार भर्ती परीक्षा का अंतिम परिणाम आया तो संजय की मेहनत रंग लाई. उन्होंने 595.98 अंक हासिल किए और प्रदेश की मेरिट में पहला स्थान प्राप्त किया. इस भर्ती में कुल 500 पद थे, जिनके लिए चयन प्रक्रिया पूरी की गई. लिखित परीक्षा के बाद 5,113 अभ्यर्थी अगले चरण के लिए पात्र हुए थे. इसके बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर अंतिम मेरिट तैयार हुई. अंतिम परिणाम में 436 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, जबकि 64 पद खाली रह गए.