गोद में 6 महीने की बेटी, आंखों में SDM बनने का सपना; प्रीति ने ऐसे रचा सफलता का इतिहास

बिहार के दरभंगा की प्रीति कुमारी ने साबित किया कि शादी और मातृत्व के बाद भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं.

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Reepu Kumari

बिहार के दरभंगा की प्रीति कुमारी की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो शादी और मां बनने के बाद अपने करियर के सपनों को पीछे छोड़ देती हैं. प्रीति ने परिवार की जिम्मेदारियों के साथ अपने लक्ष्य को भी प्राथमिकता दी. शिक्षक की नौकरी करते हुए उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जारी रखी. पहले प्रयास में उन्हें निराशा मिली, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत पर भरोसा बनाए रखा और दोबारा कोशिश की.

उनकी सफलता का सफर आसान नहीं था. घर और नौकरी के बीच समय निकालना, पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखना और छोटी बच्ची की देखभाल करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था. इसके बावजूद उन्होंने BPSC की तैयारी नहीं छोड़ी. आखिरकार 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में 166वीं रैंक हासिल कर उन्होंने SDM बनने का सपना पूरा किया. उनकी कहानी बताती है कि सीमित समय में भी सही योजना और लगातार प्रयास से लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है.

नवोदय विद्यालय से शुरू हुई शिक्षा की यात्रा

प्रीति कुमारी बिहार के दरभंगा जिले की रहने वाली हैं. उनके पिता नंद किशोर प्रसाद नवोदय विद्यालय में शिक्षक हैं, जबकि मां अनीता कुमारी गृहिणी हैं. परिवार में शिक्षा को खास महत्व दिया जाता था. प्रीति ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय, दरभंगा से की और 12वीं तक की शिक्षा वहीं पूरी की. पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि ने आगे की शैक्षणिक यात्रा की नींव रखी.


भुवनेश्वर से दिल्ली तक हासिल की उच्च शिक्षा

12वीं के बाद प्रीति ने भुवनेश्वर के रीजनल कॉलेज से बीएससी और बीएड की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली पहुंचीं. यहां उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी जेएनयू से लाइफ साइंसेज में एमएससी की डिग्री हासिल की. लगातार पढ़ाई के बाद उन्हें नवोदय विद्यालय में शिक्षक की नौकरी मिल गई. उन्होंने करीब तीन साल तक नवोदय विद्यालय और दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाया.

शादी के बाद भी जारी रखी अफसर बनने की तैयारी

शिक्षक के रूप में काम करने के दौरान साल 2023 में प्रीति की शादी मुजफ्फरपुर के रहने वाले सरोज कुमार से हुई. शादी के बाद उनके जीवन में परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ गईं. नौकरी और घर संभालने के साथ उन्होंने प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना नहीं छोड़ा. दिनभर के व्यस्त कार्यक्रम के बाद जब भी समय मिलता, वह BPSC की तैयारी में जुट जाती थीं. इसी तरह उन्होंने अपनी पढ़ाई का सिलसिला जारी रखा.

पहले प्रयास में मिली नाकामी, फिर की वापसी

BPSC के पहले प्रयास में प्रीति ने प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन मुख्य परीक्षा में उन्हें सफलता नहीं मिली. यह उनके लिए निराशाजनक जरूर था, लेकिन उन्होंने इसे अपनी मंजिल का अंत नहीं माना. उन्होंने अपनी तैयारी में कमियों को समझा और दोबारा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी. इस बार उनके सामने नौकरी और परिवार के साथ मातृत्व की जिम्मेदारी भी थी. फिर भी उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया.

गोद में छह महीने की बेटी लेकर पहुंचीं इंटरव्यू देने

BPSC की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा के दूसरे प्रयास में प्रीति इंटरव्यू देने पहुंचीं, तो उनकी गोद में छह महीने की बेटी थी. इसके बावजूद उनका आत्मविश्वास और तैयारी मजबूत रही. उन्होंने इस परीक्षा में 166वीं रैंक हासिल की और एसडीएम पद के लिए चयनित हुईं. अपनी सफलता के बाद एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि प्रतियोगी परीक्षा में कामयाबी के लिए घंटों पढ़ना ही जरूरी नहीं है. निरंतरता और उपलब्ध समय का सही इस्तेमाल भी सफलता में अहम भूमिका निभाता है.