'मैं गैंगरेप जैसा महसूस करना चाहती हूं', महिला के एक मैसेज से पलट गया केस, शख्स को मिले 55 करोड़ रुपए

अमेरिका के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डेविड सबातिनी को यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद करियर गंवाना पड़ा. अब अदालत ने मानहानि मामले में उन्हें 6 मिलियन डॉलर का मुआवजा दिया है.

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Sagar Bhardwaj

अमेरिका के मशहूर जीवविज्ञानी डेविड सबातिनी का करियर कभी बुलंदियों पर था. वह मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के प्रमुख वैज्ञानिकों में शामिल थे. उनके शोध को वैज्ञानिक समुदाय में काफी सराहना मिली थी और उन्हें भविष्य में नोबेल पुरस्कार का संभावित दावेदार भी माना जा रहा था.

लेकिन करीब पांच साल पहले उनकी एक जूनियर सहकर्मी क्रिस्टिन नाउज ने उन पर यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए. इसके बाद उनका शानदार करियर विवादों में घिर गया. इन आरोपों के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने में उन्हें अपना पद, प्रतिष्ठा और पेशेवर पहचान गंवानी पड़ी.

पुराने टेक्स्ट मैसेज से फिर चर्चा में आया मामला

अब डेली मेल की एक रिपोर्ट में क्रिस्टिन नाउज के कुछ कथित टेक्स्ट मैसेज सामने आए हैं. इनमें एक संदेश में उन्होंने लिखा था, 'मैं कल सुबह उठने का इंतजार नहीं कर सकती और ऐसा महसूस करने के लिए बेताब हूं कि मेरे साथ गैंगरेप हुआ हो.'


यह मैसेज सबातिनी की वकील लिसा एरोवुड ने वीडियो के जरिए हुई गवाही के दौरान पढ़कर सुनाया. वकील ने नाउज से उनके पुराने संदेशों के आधार पर यौन संबंधों को लेकर उनकी पसंद के बारे में भी सवाल किए. रिपोर्ट के मुताबिक, नाउज ने शुरुआत में सीधे जवाब देने से परहेज किया, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि वह अधिक आक्रामक और कठोर यौन संबंधों के लिए तैयार थीं.

2018 में शुरू हुआ था दोनों का रिश्ता

58 वर्षीय सबातिनी और 38 वर्षीय नाउज के बीच 2018 में संबंध शुरू हुए थे, जो करीब एक साल तक चले. सबातिनी का कहना था कि दोनों के बीच रिश्ता आपसी सहमति से था. उनके मुताबिक, नाउज ने जब उनसे अधिक प्रतिबद्ध रिश्ते की इच्छा जताई और उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया, तब उनके खिलाफ आरोप लगाए गए.

वहीं, नाउज का दावा था कि यह रिश्ता उनकी इच्छा के मुताबिक नहीं था. उनका कहना था कि सबातिनी उनके मेंटर थे और उनके करियर पर उनका काफी प्रभाव था. इस वजह से उनके लिए रिश्ता खत्म करना मुश्किल था. उन्होंने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का माहौल बनाने का आरोप भी लगाया था.

जांच के बाद छोड़ना पड़ा MIT का पद

व्हाइटहेड इंस्टीट्यूट की स्वतंत्र जांच में सबातिनी को संस्थान की कार्यस्थल नीतियों का उल्लंघन करने का दोषी पाया गया था. इसमें यौन उत्पीड़न से संबंधित नियम भी शामिल थे. इसके बाद उन्होंने 2021 में संस्थान से इस्तीफा दे दिया और बाद में MIT में अपना स्थायी प्रोफेसर पद भी छोड़ दिया.

इस विवाद का असर उनके दूसरे पेशेवर अवसरों पर भी पड़ा. उनकी कई पेशेवर साझेदारियां खत्म हो गईं और कंसल्टिंग के अवसर भी हाथ से निकल गए. 2022 में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में संभावित नियुक्ति का रास्ता भी छात्रों, शिक्षकों और पूर्व छात्रों के विरोध के कारण बंद हो गया.

मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ा गहरा असर

बोस्टन ग्लोब की रिपोर्ट के मुताबिक, मुकदमे के दौरान पेश की गई गवाही में बताया गया कि इस पूरे विवाद के कारण सबातिनी डिप्रेशन से जूझने लगे थे और उन्होंने आत्महत्या की कोशिश भी की थी. फैसले के बाद एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, 'मैंने सब कुछ खो दिया. मेरी सामान्य जिंदगी का कुछ भी बाकी नहीं बचा था.'

अदालत ने दिया 6 मिलियन डॉलर का मुआवजा

16 अक्टूबर 2026 को इस कानूनी लड़ाई में सबातिनी को बड़ी राहत मिली. सफोक काउंटी की जूरी ने क्रिस्टिन नाउज को मानहानि और उनके पेशेवर तथा संभावित व्यावसायिक संबंधों में हस्तक्षेप करने के लिए जिम्मेदार ठहराया.

जूरी ने सबातिनी के पक्ष में 6 मिलियन डॉलर (करीब 55 करोड़ रुपये) का मुआवजा देने का फैसला सुनाया. साथ ही, नाउज की ओर से सबातिनी के खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न और प्रतिशोध समेत अन्य जवाबी दावों को भी खारिज कर दिया.