संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. अब UPSC द्वारा आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थियों का फेस ऑथेंटिकेशन किया जाएगा. इसका मतलब यह है कि परीक्षा केंद्र पर पहुंचने के बाद उम्मीदवार की पहचान चेहरे की पहचान तकनीक से सत्यापित की जाएगी.
UPSC अधिकारियों के अनुसार, यह कदम परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को और मजबूत करेगा. आयोग की वेबसाइट पर जारी सूचना में कहा गया है कि हर उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र पर फेस ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा. इससे फर्जी अभ्यर्थियों, पहचान बदलकर परीक्षा देने और नकल जैसी गड़बड़ियों पर रोक लगेगी.
UPSC देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाएं आयोजित करता है. इनमें सिविल सेवा परीक्षा शामिल है, जिसके जरिए IAS, IFS और IPS जैसे शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों का चयन होता है. इसके अलावा NDA, CDS और अन्य केंद्रीय सेवाओं की भर्ती परीक्षाएं भी UPSC ही कराता है.
UPSC ने इस नई व्यवस्था को लागू करने से पहले इसका परीक्षण भी किया था. सितंबर 2025 में आयोजित NDA-II, NA-II और CDS-II परीक्षाओं के दौरान गुरुग्राम के कुछ परीक्षा केंद्रों पर फेस ऑथेंटिकेशन का पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था.
इस पायलट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया गया. उम्मीदवार के चेहरे की लाइव तस्वीर को उनके आवेदन फॉर्म में लगी फोटो से डिजिटल रूप से मिलाया गया. इससे पहचान की पुष्टि बेहद तेजी और सटीकता से हो सकी.
UPSC चेयरमैन अजय कुमार के अनुसार, इस नई तकनीक से हर उम्मीदवार का सत्यापन औसतन सिर्फ 8 से 10 सेकंड में हो गया. इससे परीक्षा केंद्रों पर लंबी कतारें कम हुईं और प्रवेश प्रक्रिया भी आसान हो गई.
अब UPSC इस फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम को सभी भर्ती परीक्षाओं में लागू करने जा रहा है. आयोग का मानना है कि इससे परीक्षा की निष्पक्षता बनी रहेगी और योग्य उम्मीदवारों का चयन और अधिक भरोसेमंद तरीके से हो सकेगा.