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ये क्या हो रहा है? 70% युवा एक साल में कह रहे हैं जॉब को बाय-बाय, जानिए क्यों

देश में नौकरी बदलने का ट्रेंड तेज हो गया है. एक नई स्टडी बताती है कि 62% लोग लगातार बेहतर विकल्प खोज रहे हैं, और 70% एक साल में अपनी मौजूदा नौकरी छोड़ने को तैयार हैं.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: टेक कंपनियों में AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ छंटनी की लहर अभी भी जारी है. TCS, Intel, Apple, Amazon जैसी बड़ी कंपनियां कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं. लेकिन इसी दौर में एक और तस्वीर उभर रही है-कर्मचारी खुद भी अब एक जगह लंबे समय तक नहीं टिकना चाहते. नई रिपोर्ट बताती है कि नौकरी छोड़ने का फैसला केवल मोटे पैकेज की चाह से नहीं लिया जा रहा.

कर्मचारी अब मानसिक शांति, लचीले वर्क मॉडल, और बेहतर टीम तालमेल को प्राथमिकता दे रहे हैं. यही वजह है कि नौकरी बदलना अब मजबूरी से ज्यादा पसंद बनता जा रहा है.

नौकरी बदलने की तैयारी रिकॉर्ड स्तर पर

ग्रेट प्लेस टू वर्क की ताजा स्टडी के मुताबिक, 62% कर्मचारी लगातार नए अवसरों पर नज़र बनाए हुए हैं. इनमें से 70% का साफ कहना है कि अगर सही विकल्प मिला तो वे एक साल से भी कम समय में अपनी वर्तमान कंपनी छोड़ देंगे. यह आंकड़ा चौंकाने वाला इसलिए भी है क्योंकि पहले कर्मचारी स्थिरता को महत्व देते थे. अब यह सोच बदल रही है और बदलाव की चाह तेज़ हो रही है.

कुछ ही लोग टिके रहना चाहते हैं

रिपोर्ट में पाया गया कि केवल 26% कर्मचारी एक साल से ज्यादा मौजूदा भूमिका में बने रहना चाहते हैं. 4% लोग अभी तक किसी ठोस निर्णय पर नहीं पहुंचे. वहीं 70% बदलाव को तैयार बैठे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि तेज़ी से बदलते बाजार और नई स्किल्स की मांग ने कर्मचारियों को यह भरोसा दिया है कि नई शुरुआत कठिन नहीं, बल्कि ज़रूरी कदम हो सकती है.

हेल्थ और फार्मा सेक्टर सबसे आगे

हेल्थकेयर, बायोटेक और फार्मा सेक्टर में 81% कर्मचारी एक साल के अंदर जॉब बदलने के मूड में हैं. इस बदलाव में युवा प्रोफेशनल्स की संख्या सबसे ज्यादा है. इन क्षेत्रों में काम का दबाव, शिफ्ट सिस्टम और मानसिक थकान प्रमुख कारण माने जा रहे हैं. यही वजह है कि कर्मचारी जल्दी बदलाव को प्राथमिकता दे रहे हैं, ताकि वे बेहतर वातावरण में काम कर सकें.

नई पीढ़ी ज्यादा साहसी फैसले ले रही है

स्टडी में 76% जेन Z और 68% मिलेनियल्स ने माना कि वे 12 महीनों के भीतर नौकरी बदल सकते हैं. यह पीढ़ी काम में उद्देश्य, सम्मान और आज़ादी को ज़्यादा महत्व देती है. वे ऐसी कंपनी चाहते हैं जहां उन्हें सुना जाए और निर्णयों में भागीदारी मिले. सैलरी भले अहम हो, लेकिन यह अकेला कारण नहीं रहा. काम में संतुष्टि सबसे बड़ा फैक्टर बन रहा है.

वर्क-कल्चर बना सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट

करीब 66% कर्मचारियों ने कहा कि वे सकारात्मक वर्क-कल्चर, लचीलापन, और संतुलित जीवन की चाह में नौकरी छोड़ सकते हैं, भले ही सैलरी कम हो. वर्क-लाइफ बैलेंस बिगड़ना, मैनेजमेंट से संवाद की कमी और बढ़ता तनाव बदलाव के मुख्य कारण हैं. सीनियर कर्मचारी भी इसी बदलाव की राह पर चलते दिख रहे हैं, जो इस ट्रेंड को और मजबूत करता है.