पीएम मोदी की अपील पर देश में आया 'जल सैलाब'; 1 साल में जनता ने बना डाले रिकॉर्ड 1.55 करोड़ जल ढांचे
केंद्र सरकार का महत्वाकांक्षी 'जल संचय जन भागीदारी' अभियान अपने तय लक्ष्य से काफी आगे निकल गया है. देश की जनता के सहयोग से अब तक एक करोड़ पचास लाख से ज्यादा जल संरचनाओं का निर्माण पूरा किया जा चुका है.
पानी की बूंद-बूंद सहेजने की दिशा में भारत ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कामयाबी हासिल की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच के तहत शुरू किए गए जल संरक्षण अभियान को देश के आम नागरिकों का असाधारण समर्थन मिला है. सरकारी फाइलों से निकलकर यह मुहिम अब देश के गांवों और शहरों में एक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है. जनता के इसी सक्रिय जुड़ाव का नतीजा है कि पानी बचाने का सरकारी लक्ष्य समय सीमा से बहुत पहले ही पीछे छूट गया है.
तय लक्ष्य से बहुत आगे निकली मुहिम
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने इस बड़ी सफलता से जुड़े आंकड़े जारी करते हुए देशवासियों की तारीफ की है. उन्होंने बताया कि सरकार ने 31 मई 2026 तक पूरे देश में एक करोड़ जल संरचनाएं तैयार करने का कठिन लक्ष्य तय किया था. मगर समाज के विभिन्न वर्गों की जागरूकता की बदौलत देश में अब तक कुल एक करोड़ 55 लाख से अधिक ऊंचे और गहरे ढांचे बनाए जा चुके हैं, जो तय आंकड़े से 55 लाख ज्यादा हैं.
प्रधानमंत्री के एक आह्वान का बड़ा असर
इस बड़ी सफलता की नींव सितंबर 2024 में गुजरात के सूरत शहर से पड़ी थी, जहां प्रधानमंत्री ने जल संचय को लेकर एक भावुक अपील की थी. उनके इस एक आह्वान पर सूरत में व्यापार करने वाले प्रवासियों ने अपने पैतृक गांवों में रिकॉर्ड चालीस हजार जल ढांचे खड़े करवा दिए. इसी तरह मध्य प्रदेश के कई अंचलों और बिहार के करीब दस जिलों में भी स्थानीय लोगों ने जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर तालाबों को सहेजने का काम किया है.
आंध्र प्रदेश बना देश का नंबर वन राज्य
अगर राज्यों के प्रदर्शन की बात करें, तो इस पूरे अभियान में आंध्र प्रदेश देश भर में सबसे शीर्ष पायदान पर काबिज हुआ है. अकेले आंध्र प्रदेश में रिकॉर्ड 31.08 लाख छोटे-बड़े जलाशयों और वाटर रीचार्ज ढांचों का निर्माण हुआ है. इसके बाद छत्तीसगढ़ में 23.07 लाख और मध्य प्रदेश में 21.90 लाख काम पूरे किए गए. जिलों के मामले में भी आंध्र का अल्लूरी सीताराम राजू जिला पूरे देश में सबसे अव्वल बनकर उभरा है.
जनशक्ति और सरकारी तंत्र का अनूठा तालमेल
इस पूरे अभियान की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि जहां सरकारी तंत्र ने मनरेगा योजना के माध्यम से केवल दस लाख ढांचों का निर्माण कराया, वहीं बाकी का विशाल काम देश की आम जनता ने अपने दम पर पूरा किया. कई बड़े उद्योगपतियों ने सीएसआर फंड की मदद से सूखी नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए करोड़ों रुपये दान किए. अब केंद्र सरकार ने साल 2027 तक दो करोड़ संरचनाएं बनाने का एक नया महत्वाकांक्षी लक्ष्य सामने रखा है.