IT कंपनियों में नौकरियां जाने का सिलसिला लगातार जारी हैं. मई तक करीब 92,000 कर्मचारियों की नौकरियां जा चुकी हैं. अब IT कर्मचारियों को एक और बड़ा झटका लगने वाला है. एक दिग्गज आईटी कंपनी जल्द ही विश्व स्तर पर 12,000 से 15,000 कर्मचारियों की भारी छंटनी करने जा रही है. इसका सबसे बड़ा असर भारत के IT कर्मचारियों पर पड़ेगा.
हाल ही में 29 अप्रैल को कंपनी ने प्रोजेक्ट लीप नामक एक नए अभियान का ऐलान किया है. इस योजना के तहत छंटनी के खर्च के तौर पर 230 से लेकर 320 मिलियन डॉलर तक का बजट तय किया गया है. यह अहम खबर आईटी सेक्टर में काम कर रहे हजारों कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ा झटका है.
कॉग्निजेंट में विश्च स्तर पर 3,57,000 से ज्यादा लोग काम करते हैं. इनमें से करीब 2,50,000 कर्मचारी अकेले भारत में ही मौजूद हैं. भारत में औसत सालाना वेतन 15 लाख रुपये और छह महीने का मुआवजा मानकर हर कर्मचारी पर 7.5 लाख रुपये खर्च बैठता है. कंपनी के कुल छंटनी बजट को देखते हुए यह अनुमान है कि सिर्फ भारत में लगभग 12,000 से 13,000 कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा.
हाल ही में टीसीएस, एक्सेंचर, एचसीएल टेक और ओरेकल जैसी दिग्गज कंपनियों ने भी इसी तरह छंटनी की है. नई भर्तियां अब कम हो गई हैं और बिना काम बैठे कर्मचारियों की संख्या बहुत अधिक हो गई है. मई 2026 की शुरुआत तक 98 कंपनियों में 92,000 से ज्यादा टेक कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है. AI में निवेश में बदलावों की वजह से 2026 टेक नौकरियों के लिए एक बहुत ही मुश्किल साल साबित हो रहा है. Meta, Amazon और Oracle जैसी बड़ी कंपनियों में बड़े पैमाने पर छंटनी से एक बदलाव का संकेत मिलता है.