ईरान में गिरी सरकार तो पाकिस्तान हो जाएगा तबाह! खामेनेई सरकार को अमेरिका से क्यों बचाना चाहता है इस्लामाबाद?
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा हुआ है. हालांकि इन दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की वजह से पाकिस्तान में भी अशांति का माहौल है, इसके पीछे के कारण को समझना बेहद जरूरी है.
नई दिल्ली: ईरान में इस समय तनाव का माहौल है. पूरे देश में बढ़ती महंगाई को लेकर लोगों में नाराजगी है और लोग खामेनेई सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. हालांकि बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन भी प्रदर्शनकारियों को शांत कराने के लिए एक्शन ले रही है. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों पर चल रहे एक्शन के खिलाफ अपने आवाज उठाए और ईरान के सरकार को उनपर हमले ना करने की चेतावनी दी.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बढ़ते तनाव को देखते हुए यह तक कह दिया कि ईरान के खिलाफ कभी भी अमेरिका एक्शन ले सकता है. लेकिन फिर अमेरिका के तेवर नरम हो गए. डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सरकार के प्रति क्यों नरमी दिखाई है इसपर कई लोग सवाल खड़े कर रहे हैं.
ट्रंप से मिलने पहुंचे थे पाक सेना चीफ
अमेरिका के इस नरमी के पीछे पाकिस्तान की चिंता बताई जा रही है. इससे पहले भी जब ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष चल रहे थे तो कहा जा रहा था कि अमेरिकी समर्थन से इजरायल किसी भी समय ईरान में बदलाव ला सकता है. लेकिन उसी समय पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर राष्ट्रपति ट्रंप से मिलने पहुंचे थे. सूत्रों का दावा है कि जनरल मुनीर ने ट्रंप को ईरान की सरकार गिराने से रोकने की सलाह दी, जिसके चलते अमेरिका ने आगे कोई कार्रवाई नहीं की. अभी भी जब अमेरिका और ईरान के बीच सब सही नहीं है तब भी पाकिस्तान लगातार अमेरिकी एक्शन का विरोध कर रहा है. पाकिस्तान क्यों ईरान को बचाना चाहता है इस बात को समझना बेहद जरूरी है.
क्यों डर रहा पाकिस्तान?
पाकिस्तानी सूत्रों का कहना है कि इस्लामाबाद ईरान में किसी भी तरह के शासन परिवर्तन का विरोध करता है. ऐसा इसलिए क्योंकि ईरान के बदलाव का सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ सकता है. ईरान और पाकिस्तान के बीच 900 किलोमीटर लंबी सीमा हैं, जो पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत से जुड़ी है. पाकिस्तान को इस बात का डर है कि अगर ईरान में अशांति और अस्थिरता फैलती है तो पाकिस्तान में भी हथियारों की तस्करी बढ़ जाएगी और शरणार्थियों का सैलाब आ जाएगा. आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है इसलिए इस्लामाबाद इस लड़ाई को रुकवाना चाहता है. इतना ही नहीं कुछ लोगों का कहना है कि शरणार्थी अगर पाकिस्तान में आते हैं तो पाकिस्तान में भी गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन सकती है.