पाकिस्तान को क्यों नहीं मिली ब्रिक्स में एंट्री? जानिए भारत के 'वीटो' का सच

पाकिस्तान ने 2023 में ब्रिक्स सदस्यता के लिए आवेदन किया था. हालांकि, सर्वसम्मति के नियम और भारत के कड़े रुख के कारण उसकी एंट्री का रास्ता अभी बंद है.

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Sagar Bhardwaj

पाकिस्तान ने 2023 में उभरती अर्थव्यवस्थाओं के शक्तिशाली समूह ब्रिक्स (BRICS) की सदस्यता पाने के लिए औपचारिक आवेदन किया था. गंभीर आर्थिक संकटों से जूझ रहा पाकिस्तान इस मंच के जरिए वित्तीय संसाधनों को विविध बनाने और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समावेशी बहुपक्षवाद में योगदान देने की इच्छा रखता है.

भारत का 'वीटो' और सर्वसम्मति का नियम

मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया जैसे देशों को शामिल कर ब्रिक्स का विस्तार हुआ है. लेकिन पाकिस्तान बाहर ही है. ब्रिक्स के नियमों के तहत नए सदस्य को शामिल करने के लिए सभी मौजूदा पूर्ण सदस्यों की सर्वसम्मति अनिवार्य है. भारत के विरोध के कारण पाकिस्तान के प्रवेश पर एक प्रकार का अघोषित 'वीटो' लगा हुआ है.

न्यू डेवलपमेंट बैंक और चीन-रूस का समर्थन

पाकिस्तान को चीन और रूस से समर्थन के संकेत मिले हैं. आईएमएफ और विश्व बैंक पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए पाकिस्तान ने ब्रिक्स समर्थित 'न्यू डेवलपमेंट बैंक' (NDB) में $580 मिलियन का शेयर खरीदा है. इसके बावजूद, भारत की आपत्तियों को पार करना इस्लामाबाद के लिए सबसे बड़ी कूटनीतिक चुनौती बना हुआ है.