इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन हो गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर शनिवार को इस बात का दावा किया. जिसके बाद ईरानी मीडिया ने भी इसकी पुष्टि कर दी.
खामेनेई पिछले तीन दशकों से भी ज्यादा समय से ईरान पर राज कर रहे थे. अब उनके निधन के बाद से लगातार यह सवाल उठ रहा है कि अब ईरान का सुप्रीम लीडर किसे बनाया जाएगा. उत्तराधिकार की प्रक्रिया अचानक मौत की घटना में काम करेगी यान नहीं यह लोगों के मन में सवाल है.
ईरान के पॉलिटिकल सिस्टम के बारे में रॉयटर्स कहता है कि ईरान के संविधान के मुताबिक, विलायत-ए-फ़कीह के सिद्धांत के तहत सुप्रीम लीडर एक मौलवी होना चाहिए. ये सिस्टम मानता है कि नौवीं सदी में गायब हुए शिया मुस्लिम 12वें इमाम के लौटने तक, अधिकार एक सीनियर धार्मिक विद्वान के पास होना चाहिए. खामेनेई से पहले, इस्लामिक रिपब्लिक के संस्थापक अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने इस पद को संभाला था.
देश के सभी मामलों में सुप्रीम लीडर का आखिरी फैसला होता है, लेकिन अब सुप्रीम लीडर के पद के बारे में कौन फैसला तय करेगा इस बात पर अभी कोई भी जानकारी सामने नहीं आई है. इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर के अलावा उनके परिवार और उनके करीबी सलाहकारों के भी मारे जाने की भी खबर है. लेकिन अभी भी कई लोगों हैं जिन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है.
एनालिस्ट्स ने इस पद के लिए पहले संभावित उम्मीदवारों के नाम का जिक्र किया था. जिसमें उनके बेटे मोजतबा खामेनेई और इस्लामिक रिपब्लिक के फाउंडर के पोते हसन खोमैनी शामिल हैं. इनके अलावा दूसरे सीनियर मौलवियों का भी जिक्र किया गया है. हालांकि, रॉयटर्स का यह भी कहना है कि अभी कोई भी आदमी खामेनेई की अथॉरिटी नहीं रखता है. कोई भी वारिस रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और सीनियर मौलवियों की संस्थाओं जैसे ताकतवर इंस्टीट्यूशन पर कंट्रोल बनाने के लिए संघर्ष कर सकता है.
नियम के मुताबिक उत्तराधिकार पर कोई भी फैसला इस्लामिक रिपब्लिक के सबसे सीनियर पावर ब्रोकर्स द्वारा किया जाएगा. जिसके बाद असेंबली उसे औपचारिक रूप से मंजूरी देगी. लेकिन खबर यह भी है कि शनिवार के हमले में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कई टॉप लोग भी मारे गए हैं. इसलिए अभी यह साफ नहीं है कि इस प्रोसेस में किसे इस पद का दावेदार बनाया जाएगा.
ईरान के सुप्रीम लीडर की रेस में सबसे पहला नाम आयतुल्लाह अलीरेजा अराफी का सामने आ रहा है. जो गार्जियन काउंसिल के सदस्य हैं. इनके अलावा हुज्जत-उल-इस्लाम मोहसिन कौमी का भी नाम सामने आ रहा है. अराफी को खामेनेई का सबसे करीबी माना जाता था. तीसरे नंबर पर आयतुल्लाह मोहसिन अराकी का भी नाम शामिल है. चौथे नंबर पर जी.एच. मोहसेनी एजेई और हाशमे हुसैनी बुशेहरी का भी नाम सामने आ रहा है.