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पश्चिम बंगाल में बदले चुनावी समीकरण! SIR के बाद वोटर लिस्ट से हटाए गए 61 लाख, 1 करोड़ के ऊपर जा सकता है आंकड़ा

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन संशोधन के बाद मतदाता सूची में 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है. करीब 61 लाख नाम हटाए गए, जबकि 60 लाख मतदाता अभी भी जांच के दायरे में हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
पश्चिम बंगाल में बदले चुनावी समीकरण! SIR के बाद वोटर लिस्ट से हटाए गए 61 लाख, 1 करोड़ के ऊपर जा सकता है आंकड़ा
Courtesy: ani

पश्चिम बंगाल में पिछले चार महीनों से चल रही SIR प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है. निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अंतिम मतदाता सूची ने राज्य की चुनावी तस्वीर को नया रूप दे दिया है. अक्टूबर में जहां कुल मतदाता 7.66 करोड़ थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 7.04 करोड़ रह गई है. इस बदलाव ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं और लाखों मतदाता अभी भी जांच के घेरे में हैं.

मतदाताओं की संख्या में बड़ी गिरावट

चुनाव आयोग के अनुसार, इस संशोधन के दौरान 63,66,952 नाम सूची से हटाए गए. आयोग का कहना है कि ये मतदाता या तो मर चुके हैं या स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर चले गए हैं. कुल मिलाकर लगभग 8 प्रतिशत की शुद्ध कमी दर्ज की गई है. यह गिरावट राज्य की चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए समीकरण बदल सकती है.

पुरुष, महिला और थर्ड जेंडर आंकड़े

नई सूची के मुताबिक, पुरुष मतदाताओं की संख्या 3,60,22,642 है, जो सबसे अधिक है. महिला मतदाताओं की संख्या 3,44,35,260 दर्ज की गई है. वहीं राज्य में थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 1,382 बताई गई है. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि लैंगिक आधार पर मतदाता संरचना में पुरुषों की बढ़त बनी हुई है, लेकिन महिला भागीदारी भी मजबूत स्तर पर है.

जांच के दायरे में 60 लाख नाम

सबसे विवादास्पद पहलू यह है कि 60,06,675 मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल तो हैं, लेकिन उनके आगे 'विचाराधीन' का चिन्ह लगाया गया है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त 501 न्यायिक अधिकारी इन मामलों की समीक्षा कर रहे हैं. मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि जब तक पूरक सूची प्रकाशित नहीं होती, ये मतदाता मतदान नहीं कर सकेंगे.

संशोधन पर उठे सवाल

इस व्यापक प्रक्रिया के दौरान माइक्रो-ऑब्जर्वर्स की नियुक्ति को लेकर विवाद हुआ. पहली बार केंद्रीय कर्मचारियों को राज्य के अधिकारियों के कार्य की निगरानी के लिए तैनात किया गया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. अदालत ने बाद में न्यायिक अधिकारियों को पात्रता की जांच का जिम्मा सौंपा, जिससे प्रक्रिया और अधिक संवेदनशील हो गई.

सुरक्षा व्यवस्था और आगे की तैयारी

आगामी चुनावों को देखते हुए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की 240 कंपनियां पहले से तैनात हैं और 240 अन्य कंपनियां जल्द पहुंचेंगी. चुनाव की घोषणा तक कानून-व्यवस्था राज्य प्रशासन के अधीन रहेगी, लेकिन अधिसूचना जारी होते ही पूरा नियंत्रण चुनाव आयोग के हाथ में चला जाएगा.