ट्रंप, सेना और घर में ही आफत: असीम मुनीर के अगले कदम से हिल जाएगा पाकिस्तान?
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर इस समय अपने करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं. अमेरिका गाजा में शांति और पुनर्निर्माण मिशन के लिए पाकिस्तान से सैनिक भेजने का दबाव बना रहा है.
नई दिल्ली: पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर इस समय अपने करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं. अमेरिका गाजा में शांति और पुनर्निर्माण मिशन के लिए पाकिस्तान से सैनिक भेजने का दबाव बना रहा है. मुनिर की यह प्रतिक्रिया न सिर्फ अमेरिका के साथ रिश्तों को प्रभावित करेगी, बल्कि घरेलू राजनीति में भी बड़ा असर डाल सकती है. विपक्षी दल और धार्मिक संगठन किसी भी निर्णय के खिलाफ सड़कों पर उतर सकते हैं, जिससे देश में अशांति फैलने का खतरा है.
अमेरिका का दबाव
अमेरिका गाजा में शांति सेना के लिए मुस्लिम बहुल देशों से सैनिक भेजने की योजना पर काम कर रहा है. पाकिस्तान को भी इस मिशन में शामिल होने का आमंत्रण मिला है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुनिर की अगली मुलाकात में इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है. यदि मुनीर सहयोग नहीं करते हैं, तो अमेरिका की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है, जो पाकिस्तान के लिए राजनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर चुनौतीपूर्ण होगा.
विरोध प्रदर्शन का खतरा
यदि पाकिस्तान सैनिक गाजा में भेजे जाते हैं, तो यह देश में राजनीतिक और सामाजिक असंतोष पैदा कर सकता है. धार्मिक और इस्लामी समूह इस कदम का विरोध कर सकते हैं. विपक्षी दल, खासकर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थक, मुनीर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर सकते हैं. यह स्थिति देश की आंतरिक स्थिरता के लिए जोखिम भरी साबित हो सकती है.
पाकिस्तान की वैश्विक भूमिका
मुनीर ने हाल के हफ्तों में इंडोनेशिया, मलेशिया, सऊदी अरब, तुर्की, जॉर्डन, मिस्र और कतर के नेताओं से मुलाकात की. इसका उद्देश्य मुस्लिम देशों से गाजा मिशन पर समर्थन जुटाना बताया जा रहा है. पाकिस्तान की सैन्य ताकत और अनुभव इसे इस तरह के अंतरराष्ट्रीय मिशनों में एक अहम खिलाड़ी बनाते हैं, लेकिन किसी भी कदम का घरेलू असर अत्यंत संवेदनशील है.
संभावित परिणाम और चुनौतियां
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पाकिस्तान ने सैनिक भेजने का निर्णय लिया, तो यह अमेरिका के साथ रिश्तों को मजबूत कर सकता है, लेकिन घरेलू असंतोष और विरोध प्रदर्शन तेज हो सकते हैं. मुनिर को संतुलन बनाए रखना होगा ताकि देश की सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता प्रभावित न हो. गाजा में सैन्य हस्तक्षेप से पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि और आंतरिक राजनीति दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.