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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव: राष्ट्रपति के चुनाव हारने पर क्या होता है? जानें राजनीतिक प्रभाव और समीकरण

अमेरिका में राष्ट्रपति अगर मध्यावधि चुनाव हार जाते हैं, तो संसद पर उनका नियंत्रण समाप्त हो जाता है. इससे विधायी काम रुक जाते हैं, सरकारी नीतियां प्रभावित होती हैं और जांच का सामना करना पड़ता है.

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Sagar Bhardwaj

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के दो साल बाद होने वाले मध्यावधि चुनावों में प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) और सीनेट के सदस्यों का चुनाव होता है. यदि राष्ट्रपति की पार्टी संसद में बहुमत खो देती है, तो इसे राष्ट्रपति की मध्यावधि हार माना जाता है. इससे राष्ट्रपति पद पर कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन उनकी विधायी शक्तियां बेहद सीमित हो जाती हैं.

कानून बनाने की क्षमता पर ब्रेक

संसद में विपक्षी दल का बहुमत होने पर राष्ट्रपति के बड़े बिल, बजट प्रस्ताव और नीतियां अटक जाती हैं. बिना विपक्षी दल के समर्थन के राष्ट्रपति कोई भी नया कानून पारित नहीं करा पाते. ऐसे समय में संसद और राष्ट्रपति के बीच टकराव बढ़ता है, जिससे कई बार सरकारी कामकाज (Government Shutdown) ठप होने की स्थिति भी बन जाती है.

जांच और महाभियोग का खतरा

विपक्षी दल के पास बहुमत आने से उन्हें संसदीय समितियों की कमान मिल जाती है. इससे वे राष्ट्रपति और उनके प्रशासन के फैसलों की कड़ी जांच शुरू कर सकते हैं. गंभीर परिस्थितियों में प्रतिनिधि सभा राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग (Impeachment) का प्रस्ताव भी ला सकती है, जिससे राष्ट्रपति के राजनीतिक करियर पर संकट गहरा जाता है.

नियुक्तियों में रुकावट और अध्यादेश का सहारा

यदि सीनेट में विपक्षी दल का कब्जा हो जाता है, तो राष्ट्रपति द्वारा सुप्रीम कोर्ट के जजों, कैबिनेट मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियां रोकना आसान हो जाता है. इसके परिणामस्वरूप, राष्ट्रपति को अपने नीतियां लागू करने के लिए संसद के बजाय एग्जीक्यूटिव ऑर्डर (अध्यादेशों) का सहारा लेना पड़ता है, जिन्हें बाद में बदला भी जा सकता है.

विदेश नीति पर असर

घरेलू नीतियों पर लगाम लगने के बावजूद राष्ट्रपति के पास विदेश नीति, व्यापारिक समझौतों और टैरिफ से जुड़े कई फैसले लेने का अधिकार बना रहता है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय संधियों और सैन्य बजट के लिए उन्हें संसद पर ही निर्भर रहना पड़ता है. इसलिए मध्यावधि चुनाव में हार राष्ट्रपति के पूरे कार्यकाल का रुख बदल देती है. गौरतलब है कि अमेरिका में इसी साल नवंबर में मध्यावधि चुनाव होने जा रहे हैं. ईरान से जारी जंग और तेल के बढ़ते दामों के बीच ये चुनाव ट्रंप के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होंगे.