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सेब का कचरा बनेगा पानी का ‘फिल्टर’! रिसर्च में 100% तक सीसा हटाने का दावा

वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में सेब से बचे कचरे की मदद से दूषित पानी से सीसा हटाने का परीक्षण किया. शोध में प्रोसेस किए गए सेब के अवशेष ने अनुकूल परिस्थितियों में 100 प्रतिशत तक सीसा हटाया.

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Kuldeep Sharma

पानी में मौजूद सीसा स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या बन सकता है. इसे हटाने के लिए वैज्ञानिक अब ऐसे पदार्थों की तलाश कर रहे हैं, जो प्रभावी होने के साथ आसानी से उपलब्ध भी हों. इसी दिशा में शोधकर्ताओं ने जूस बनाने के बाद बचने वाले सेब के अवशेषों का इस्तेमाल कर सीसा हटाने की क्षमता जांची.

जूस के बाद बचे सेब से तैयार हुआ बायोसॉर्बेंट

शोधकर्ताओं ने जूस बनाने की प्रक्रिया से निकलने वाले सेब के गूदे और अन्य अवशेषों को दो तरह से तैयार किया. पहले नमूने को सुखाकर पीसा और छाना गया, जबकि दूसरे नमूने से बायोरिफाइनिंग प्रक्रिया के जरिए पानी और वसा में घुलने वाले उपयोगी पदार्थ निकाल दिए गए. इसके बाद दोनों सामग्रियों को कृत्रिम रूप से तैयार सीसा युक्त पानी में आजमाया गया. परीक्षण में पानी में सीसा की शुरुआती मात्रा 20 मिलीग्राम प्रति लीटर रखी गई थी और अलग-अलग पीएच, मात्रा तथा समय के आधार पर परिणाम देखे गए.

प्रोसेस किए गए सेब के अवशेष ने हटाया 100% सीसा

शोध के दौरान करीब 5 के पीएच स्तर पर दोनों सामग्रियों ने सीसा हटाने की अच्छी क्षमता दिखाई. कच्चे सेब के कचरे ने करीब 82 प्रतिशत सीसा हटाया, जबकि बायोरिफाइनिंग के बाद तैयार सामग्री ने बेहतर परिस्थितियों में 100 प्रतिशत तक सीसा निकाल दिया. शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि बायोसॉर्बेंट की मात्रा बढ़ाने पर पानी से सीसा हटाने की कुल क्षमता बढ़ी. हालांकि, एक ग्राम सामग्री द्वारा सोखे गए सीसे की मात्रा अधिक बायोसॉर्बेंट डालने पर कम होती गई. इसलिए आगे के परीक्षणों के लिए 0.5 ग्राम प्रति लीटर मात्रा चुनी गई.


पहले एक घंटे में तेजी से कम हुआ सीसा

समय के साथ सीसा हटाने की प्रक्रिया में भी बदलाव देखा गया. प्रयोग के शुरुआती 60 मिनट में दोनों सामग्रियां अपनी अधिकतम क्षमता के लगभग 80 प्रतिशत तक सीसा सोख चुकी थीं. इसके बाद 60 से 120 मिनट के बीच प्रक्रिया की रफ्तार कुछ धीमी हुई और दो घंटे के अंत तक करीब 95 प्रतिशत सीसा हट गया. शोधकर्ताओं के गणितीय विश्लेषण में सीसा सोखने की प्रक्रिया के लिए छद्म-द्वितीय-क्रम मॉडल ने छद्म-प्रथम-क्रम मॉडल की तुलना में थोड़ा बेहतर परिणाम दिए.

पीएच बढ़ने पर बेहतर हुआ सीसा हटाने का असर

शोध में पीएच 2, 3.5 और 5.5 पर भी दोनों सामग्रियों की क्षमता जांची गई. परिणाम में पाया गया कि परीक्षण की गई सीमा में पीएच बढ़ने के साथ सीसा हटाने की क्षमता बेहतर हुई. वैज्ञानिकों के अनुसार, अधिक पीएच पर सेब आधारित सामग्री की सतह पर नकारात्मक आवेश वाले स्थान बढ़े, जिससे सकारात्मक Pb²⁺ आयनों को पकड़ना आसान हुआ.

शोध में यह भी संकेत मिला कि हाइड्रॉक्सिल और कार्बोनिल जैसे सतही समूह सीसा आयनों को रोकने की प्रक्रिया में भूमिका निभाते हैं. यह अध्ययन दिखाता है कि सेब का कृषि-खाद्य कचरा जल शोधन के लिए उपयोगी सामग्री में बदला जा सकता है.