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रूस में सेना भेजेंगे किम जोंग! पुतिन ने फैलाए हाथ, क्या दुनिया के नक्शे से मिटेगा यूक्रेन?

व्लादिमीर पुतिन और किम जोंग की मुलाकात, दुनिया को नई टेंशन देने वाली है. पूरी दुनिया में सैनिक तलाश रहे रूस को नॉर्थ कोरिया से अब आखिरी उम्मीद है. किम जोंग और व्लादिमीर पुतिन, दोनों खतरनाक इरादों वाले नेता हैं. यूक्रेन को तबाह करने में पुतिन की जिद, ज्यादा बड़ी वजह है. वहां उन्हें वित्तीय घाटा हो रहा है लेकिन वे यूक्रेन को मिटाना चाहते हैं. किम जोंग के भी इरादे कुछ ऐसे ही हैं.

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दो दशक बाद, पहली बार उत्तर कोरिया में हैं. उन्होंने तानाशाह किम जोंग से मुलाकात की है. किम जोंग अपनी दुनिया में मगन रहने वाले शासक रहे हैं लेकिन अब व्लादिमीर पुतिन उनके दरबाद में पहुंचे हैं. पुरी दुनिया से कटे रहने वाले नॉर्थ कोरिया से पुतिन को बड़ी उम्मीद है. यूक्रेन के खिलाफ जंग में उनका कोई साथ नहीं दे रहा है, ऐसे में पुतिन चाहते हैं किम जोंग की आर्मी उनकी मदद करे. रूस के हथियार, लगातार जंग की वजह से कम हो रहे हैं, ऐसे में अब व्लादिमीर पुतिन के पास कोई और चारा भी नहीं बचा है. सितंबर में दोनों नेताओं की बातचीत के बाद रूस को गोला, बारूद और मिसाइलें मिली थीं. हालांकि दोनों देश, इस बात से इनकार करते रहे हैं. 

यूक्रेन के खिलाफ जंग में दोनों देश, एक-दूसरे का साथ देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. व्लादिमीर पुतिन के दौरे के बाद यह माना जा रहा है कि दोनों देश और करीब आएंगे. किम जोंग, खुद व्लादिमीर पुतिन का स्वागत करने पहुंचे हैं. दोनों नेताओं की ये मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है.

आइए जानते हैं क्यों चर्चा में है दोनों नेताओं की मुलाकात.

- रूस वैश्विक तौर पर अलग-थलग पड़ चुका है. यूक्रेन की तबाही के लिए पुतिन को लोग जिम्मेदार मान रहे हैं. वे अपने ही देश में बुरी तरह घिरे हैं. ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि एक ताकतवर सेना, ही उनकी मदद कर सकती है.
- व्लादिमीर पुतिन चाहते हैं कि यूरेशिया में किम जोंग जैसे ताकतवर नेता उनका साथ दें. दोनों देशों के बीच अहम रणनीतिक भागेदारी पर हस्ताक्षर हो सकते हैं.
- यूनाइटेड किंगडम में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पॉलिटिकल साइंस के प्रवक्ता एडवर्ड हॉवेल  का मानना है कि 
दोनों नेता अमेरिका और पश्चिमी देशों के खिलाफ मजबूर सुरक्षा ढांचा तैयार करने पर जो दे रहे हैं.
- बीते महीने व्लादिमीर पुतिन शी जिनपिंग से मिले थे. अब नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग से. रूस, नए दोस्तों में अवसर तलाश रहा है. ज्यादातर देश, अमेरिका के साथ हैं, वहीं नॉर्थ कोरिया, अलग-थलग रहता है. पुतिन, उसे साधने की कोशिश में जुटे हैं.

क्यों नए गठजोड़ पर डरी है दुनिया?

CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक नॉर्थ कोरिया, अपने परमाणु हथियारों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहता है. किम जोंग, वैश्विक प्रतिबंधों के बाद भी परमाणु हथियारों की टेस्टिंग से बाज नहीं आते हैं. रूस सबसे ताकतवर परमाणु राष्ट्र है. पश्चिम को शक है कि अगर पुतिन और किम करीब आते हैं तो रूस, परमाणुत तकनीक उसे सौंप सकता है, जिससे किम जोंग की ताकत और बढ़ सकती है. किम जोंग के खतरनाक इरादों पर पहले ही ये दुनिया डरी हुई है. ब्रिटेन से लेकर वॉशिंगटन तक, इस बात की चर्चा है कि दोनों का युद्ध प्रिय शासन, कहीं दुनिया को नए विश्वयुद्ध की ओर न ले जाए.

क्या दुनिया से मिटने वाला है यूक्रेन, किम से क्या चाहते हैं पुतिन?

CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक व्लादिमीर पुतिन, उत्तर कोरिया के हथियारों का इस्तेमाल, यूक्रेन के खिलाफ कर रहे हैं. जब उनके पास हथियार घटे तो वे किम जोंग से मांगने पहुंचे. फरवरी में एक अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर से उत्तर कोरिया से 10,000 से ज्यादा शिपिंग कंटेनर रूस पहुंचे हैं. इनमें 260,000 मीट्रिक टन गोला-बारूद भेजे गए हैं. मार्च में एक अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया था कि रूसी सेना ने सितंबर से यूक्रेन पर कम से कम 10 उत्तर कोरिया निर्मित मिसाइलें दागी हैं.

रूस के रक्षा भंडार खत्म हो रहे है, ऐसे में किम जोंग, पुतिन का नया सहारा बन गए हैं. अब व्लादिमीर पुतिन, यूक्रेन की सैन्य मदद चाहते हैं. उत्तर कोरिया के लिए ये शिपिंग टेस्टिंग की तरह है. उन्हें अपने हथियारों की औकात भी बता चल जाएगी और रूस की मदद भी हो जाएगी. किम जोंग और पुतिन के करीबी रिश्ते हैं. रूस ने नॉर्थ कोरिया को क्या दिया है, अभी तक यह पता नहीं चल सका है. 

व्लादिमीर पुतिन, उत्तर कोरिया के सैटेलाइट कार्यक्रमों को रफ्तार देना चाहते हैं. उत्तर कोरिया ने अपना पहले जासूसी उपग्रह मैलिगयोंग-1 लॉन्च किया है. इसमें रूस ने मदद की है. उत्तर कोरिया, रूस से कुछ हथियारों की टेक्नोलॉजी मांग सकता है, जिससे बेहतर हथियार हासिलए किए जा सकें. दुनिया को दोनों देशों का परमाणु गठजोड़, नई चुनौती दे रहा है. वैश्विक गतिविधियों पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि अगर पुतिन और किम एकसाथ मिलकर जंग लड़ने लगे तो यूक्रेन के ढांचे का पूरी तरह खत्म होना तय है.