डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट के जज ने दिया झटका, विदेशी नागरिकों के निर्वासन पर लगा दी रोक, कानून के आगे झुके राष्ट्रपति
US Supreme Court judge temporarily halts deportation: व्हाइट हाउस ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. ट्रंप प्रशासन ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह इस निर्णय के बाद क्या कदम उठाएगा.
US Supreme Court judge temporarily halts deportation: अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार को तगड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने एक अहम आदेश में वेनेजुएला के नागरिकों को अमेरिका से जबरन निकाले जाने पर फिलहाल रोक लगा दी है. यह फैसला शनिवार तड़के सुनाया गया. अदालत ने ट्रंप प्रशासन को इन प्रवासियों को देश से बाहर भेजने से मना कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने अपने संक्षिप्त आदेश में कहा, "जब तक कोर्ट अगला आदेश नहीं देता, तब तक इन व्यक्तियों को अमेरिका से नहीं निकाला जाएगा." यह आदेश बिना हस्ताक्षर के जारी किया गया, लेकिन इसमें स्पष्ट रूप से ट्रंप सरकार को फटकार लगाई गई है.
दो जजों ने फैसले का विरोध किया
कोर्ट के इस फैसले से दो रूढ़िवादी जज, क्लैरेंस थॉमस और सैमुअल एलिटो, सहमत नहीं थे. उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस आदेश का विरोध किया. लेकिन बहुमत की राय के चलते यह फैसला लागू हो गया. अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) ने शुक्रवार को कोर्ट में आपात याचिका दायर की थी. उनका कहना था कि कुछ वेनेजुएलावासियों को पहले ही बसों में बैठा दिया गया है और उन्हें बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के देश से बाहर भेजा जा रहा है. इस पर कोर्ट ने तत्काल रोक लगाई.
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1798 के पुराने कानून का सहारा
ट्रंप सरकार ने एक 1798 के पुराने कानून का उपयोग करते हुए निर्वासन की प्रक्रिया तेज की थी. यह कानून आमतौर पर केवल युद्धकाल में इस्तेमाल होता है. लेकिन इस बार इसे शरणार्थियों पर लागू करने की कोशिश की गई, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया.
यह मामला ट्रंप सरकार की आव्रजन नीति और सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सीमाओं के पालन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा करता है. अगर प्रशासन कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करता है, तो यह दो प्रमुख संवैधानिक संस्थाओं के बीच टकराव को जन्म दे सकता है.
अदालती लड़ाई जारी
ACLU और अन्य संगठनों की ओर से अदालतों में कई याचिकाएं दायर की गई हैं. ट्रंप सरकार का कहना है कि वे जिन लोगों को बाहर निकालना चाहते हैं, वे एक आपराधिक गिरोह ‘Tren de Aragua’ से जुड़े हुए हैं. लेकिन अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया कि केवल आरोपों के आधार पर किसी को भी बिना सुनवाई निर्वासित नहीं किया जा सकता.