पाकिस्तान में ईरान के साथ शांति वार्ता के लिए जाएंगे जेडी वेंस, 11 अप्रैल को पहला दौरा

पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शुक्रवार को होने वाली बाचतीत के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जेडी वेंस के नेतृत्व वाली टीम को भेज रहे हैं। इस बात की पुष्टि व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने की है.

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Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: अमेरिका सैन्य कार्रवाई के बजाय ईरान के साथ कूटनीति पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फैसला किया है कि इस शनिवार को ईरान के साथ बातचीत के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व वाली टीम इस्लामाबाद जाएगी. इस बात की पुष्टि व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने की है. उन्होंने बताया कि इस अहम बातचीत के लिए उपराष्ट्रपति वेंस के साथ ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी शामिल होंगे.

देखा जाए तो यह कदम स्ट्रेटिजी में एक अहम बदलाव का संकेत दे राह है. दोनों पक्षों के बीच कई हफ्तों तक चली जंग के बाद दो हफ्तों के सीजफायर पर सहमति बनी थी. अमेरिका अब बातचीत के जरिए इस संकट को हल करना चाहता है. लेविट का कहना है कि अमेरिका और इजरालय द्वारा किए गए सैन्य हमलों ने, इस क्षेत्र में अपने सहयोगी गुटों को हथियार पहुंचाने की ईरान की क्षमता को काफी कमजोर कर दिया है.

होर्मुज जलडमरूमध्य है अमेरिका के लिए जरूरी:

अमेरिका की सबसे अहम प्राथमिकताओं में से एक है होर्मुज जलडमरूमध्य. अमेरिका इसे फिर से खोलना चाहता है. यह एक ऐसा समुद्री मार्ग है, जिसकी मदद से दुनिया की लगभग 205 तेल आपूर्ति गुजरती है. व्हाइट हाउस ने यह साफ कर दिया है कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर किसी भी तरह का टोल नहीं लगेगा. 

लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि यह जलमार्ग सभी तेल टैंकरों और कमर्शियल जहाजों के लिए पूरी तरह से खुला रहे. उन्होंने बताया कि जहाजों की आवाजाही में कुछ सुधार पहले ही देखा जा चुका है.

पाकिस्तान में बातचीत अहम कदम:

पाकिस्तान में होने वाली बातचीत बेहद ही अहम मानी जा रही है. छह हफ्तों से चले आ रहे इस संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में यह जरूरी माना जा रहा है. बता दें कि ट्रंप ने इससे पहले इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की थी. साथ ही वो स्थिति को संभालने के लिए अमेरिकी अधिकारी चीन के भी संपर्क में रहे हैं. अब देखना यह होगा कि इस्लामाबाद में आने वाले दिन होने वाली बातचीत के बाद क्या कोई दीर्घकालिक समझौता हो पाएगा, या फिर सीजफायर फिर से टूट जाएगा.