रूस पर अमेरिका का बड़ा वार! सीनेट में पास हुआ ऐसा बिल, भारत-चीन समेत इन देशों पर बढ़ सकता है दबाव
अमेरिकी सीनेट ने रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों वाले विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दी है. 86-11 मतों से पारित इस पैकेज में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर शुल्क लगाने का प्रावधान है.
नई दिल्ली: अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई का रास्ता साफ करने वाले एक अहम विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है. 86-11 के मतों से पारित इस द्विदलीय पैकेज का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बढ़ाना और यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर आर्थिक दबाव डालना है. प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले दुनिया के शीर्ष पांच खरीदार देशों पर शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है. इस सूची में चीन और भारत भी शामिल हैं. हालांकि, कुछ परिस्थितियों में छूट का प्रावधान रखा गया है.
पुतिन और रूसी संस्थानों पर भी प्रतिबंध का प्रावधान
विधेयक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों तथा रूसी ऊर्जा परियोजनाओं पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान भी शामिल है. इसके अलावा ऐसे तेल टैंकरों को भी अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में लाने की बात है, जिनका इस्तेमाल रूस अपने ऊर्जा कारोबार पर लगे प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है.
यूक्रेन के समर्थन में अमेरिका का बड़ा कदम
सीनेट में इस विधेयक को यूक्रेन के समर्थन और रूस पर दबाव बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने भी अमेरिकी सांसदों से मुलाकात कर यूक्रेन के लिए समर्थन और मदद की जरूरत पर चर्चा की थी. यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने सीनेट के फैसले के लिए अमेरिका का आभार जताया.
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ट्रंप के अधिकार बढ़ाने पर सांसदों में मतभेद
हालांकि विधेयक को दोनों दलों का समर्थन मिला, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ लगाने का व्यापक अधिकार देने को लेकर कुछ सांसदों ने चिंता जताई. विरोध करने वालों का कहना है कि इससे अमेरिका में वस्तुओं की कीमत बढ़ सकती है और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है.
सीनेट में टैरिफ संशोधन का प्रस्ताव हुआ खारिज
सीनेटर रैंड पॉल और रॉन वायडेन की ओर से ट्रंप के नए टैरिफ लगाने के अधिकार को सीमित करने के लिए संशोधन पेश किया गया था. सीनेट ने इसे 32-64 के मतों से खारिज कर दिया. विरोध करने वाले सांसदों ने आशंका जताई कि टैरिफ का इस्तेमाल व्यापक व्यापारिक दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है.
अब प्रतिनिधि सभा की बारी, आगे बढ़ी कार्रवाई की राह
सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब प्रतिनिधि सभा पर भी इस पैकेज पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है. हालांकि, सदन के कुछ शीर्ष डेमोक्रेट नेताओं ने मौजूदा स्वरूप में विधेयक को लेकर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि ट्रंप को टैरिफ के मामले में बहुत अधिक अधिकार देना अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए नुकसानदेह हो सकता है.
रूस-यूक्रेन युद्ध पर क्या पड़ेगा असर?
इस विधेयक के समर्थकों का मानना है कि रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बढ़ने से उसकी युद्ध क्षमता प्रभावित हो सकती है. वहीं विरोध करने वाले सांसदों की चिंता मुख्य रूप से अमेरिकी अर्थव्यवस्था और टैरिफ के संभावित प्रभावों को लेकर है. अब इस पूरे पैकेज की अगली दिशा प्रतिनिधि सभा में होने वाली कार्रवाई पर निर्भर करेगी.