ईरान युद्ध के बीच ट्रंप को बड़ा झटका, सैन्य कार्रवाई के विरोध में अधिकतर अमेरिकी! जानें कितने लोग कर रहे सपोर्ट
अमेरिका में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर जनमत बंटा हुआ है. ज्यादातर लोग विरोध में हैं, खासकर जमीनी सैनिक भेजने के. पेट्रोल-गैस कीमतों में उछाल और सैनिकों की जान का खतरा सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है.
नई दिल्ली: ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर अमेरिकी जनता की राय स्पष्ट रूप से बंटी हुई है. विभिन्न सर्वे दिखाते हैं कि विरोध करने वालों की संख्या समर्थकों से कहीं ज्यादा है. क्विनिपियाक यूनिवर्सिटी के सर्वे में 53 फीसदी लोगों ने कार्रवाई का विरोध किया, जबकि सिर्फ 40 फीसदी ने समर्थन जताया.
सबसे ज्यादा चिंता जमीनी सैनिक भेजने को लेकर है, जहां 75 फीसदी लोग इसका विरोध कर रहे हैं. तेल कीमतों में बढ़ोतरी और युद्ध के लंबे चलने की आशंका ने भी लोगों को परेशान कर रखा है.
जमीनी सैनिक भेजने का कड़ा विरोध
सर्वे में साफ दिखता है कि अमेरिकी जनता ईरान में जमीनी सैनिक भेजने के बिल्कुल खिलाफ है. करीब 75 फीसदी लोग इसका विरोध कर रहे हैं, जबकि सिर्फ 20 फीसदी समर्थन में हैं. यहां तक कि रिपब्लिकन समर्थक भी इस कदम से सहमत नहीं दिख रहे. लोग मानते हैं कि इससे अमेरिका की सुरक्षा बढ़ने के बजाय खतरा और बढ़ सकता है.
तेल-गैस कीमतों को लेकर डर
अमेरिकियों की सबसे बड़ी चिंता पेट्रोल और गैस की कीमतों को लेकर है. दो-तिहाई से ज्यादा लोगों का मानना है कि अगले साल गैस कीमतें और बिगड़ सकती हैं. युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ी है. लोग डर रहे हैं कि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहेगी और आम आदमी की जेब पर भारी बोझ पड़ेगा.
सैनिकों की जान का खतरा
सर्वे में 90 फीसदी अमेरिकियों ने कहा कि इस कार्रवाई से अमेरिकी सैनिकों की जान को बड़ा खतरा है. इसमें रिपब्लिकन (86%) और डेमोक्रेट (93%) दोनों शामिल हैं. लोग ईरान को खतरा मानते हैं, लेकिन युद्ध से अमेरिका की सुरक्षा बेहतर होने के बजाय स्थिति और जटिल हो सकती है. यह ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.
सर्वे में अलग-अलग नतीजे
फॉक्स न्यूज के सर्वे में राय लगभग बराबर बंटी दिखी आधे समर्थन में, आधे विरोध में. वहीं 60 फीसदी ने ईरान को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए वास्तविक खतरा माना. नोरक सर्वे में आधे लोगों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीधा खतरा बताया. कुल मिलाकर, जनता युद्ध के लंबे चलने और आर्थिक प्रभाव से डरी हुई है.