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अमेरिकी मिडटर्म चुनाव हार सकते हैं ट्रंप, सर्वे में चली डेमोक्रट्स की आंधी

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी को कड़ी चुनौती मिल रही है. महंगाई, ईरान युद्ध और सर्वेक्षणों में डेमोक्रेट्स की बढ़त ने मुकाबला दिलचस्प बनाया है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव हार सकते हैं ट्रंप, सर्वे में चली डेमोक्रट्स की आंधी
Courtesy: X

अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं. शुरुआत में रिपब्लिकन को सीनेट में बहुमत बनाए रखने की मजबूत स्थिति में माना जा रहा था, लेकिन अब कई पारंपरिक रिपब्लिकन राज्यों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कड़ी चुनौती दे रहे हैं. चुनाव में सीनेट का नियंत्रण तय होगा और इसके नतीजे ट्रंप के बाकी कार्यकाल की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं.

डेमोक्रेट्स को चार सीटों की जरूरत

सीनेट में बहुमत हासिल करने के लिए डेमोक्रेट्स को रिपब्लिकन से कम से कम चार सीटें जीतनी होंगी. टेक्सास, अलास्का, ओहायो, आयोवा और कंसास जैसे राज्यों में मुकाबला पहले से ज्यादा दिलचस्प हो गया है. अक्टूबर की शुरुआत में जारी न्यूयॉर्क टाइम्स-सिएना सर्वेक्षण में टेक्सास और अलास्का में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार आगे थे, जबकि ओहायो में भी उन्हें बढ़त मिली थी. आयोवा में रिपब्लिकन उम्मीदवार मामूली अंतर से आगे थे और कंसास में मुकाबला बराबरी का था. हालांकि, सर्वेक्षण चुनाव के अंतिम नतीजों की गारंटी नहीं होते.

ट्रंप मतदाताओं को सक्रिय करने में जुटे

ट्रंप रिपब्लिकन समर्थकों से अपील कर रहे हैं कि वे चुनाव को ऐसे लें, मानो वह खुद भी उम्मीदवार हों. इसका मकसद उन समर्थकों को मतदान के लिए प्रेरित करना है, जो राष्ट्रपति चुनाव में तो वोट देते हैं, लेकिन मध्यावधि चुनाव में अक्सर मतदान नहीं करते. ट्रंप ने रिपब्लिकन को बहुमत मिलने पर अमेरिकी नागरिकों को 5,000 डॉलर के चेक देने का वादा भी किया है. इसके अलावा, उनकी सरकार की नीतियों से प्रभावित किसानों के लिए राहत पैकेज की बात भी सामने आई है.

महंगाई और ईरान युद्ध से नाराजगी

मतदाताओं की नाराजगी रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है. पेट्रोल, किराने के सामान और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत लोगों की चिंता का प्रमुख कारण है. ईरान युद्ध को लेकर भी ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं. कृषि आधारित आयोवा और कंसास में टैरिफ तथा डीजल की कीमतों का असर महसूस किया जा रहा है. कनाडा के साथ व्यापारिक संबंधों पर तनाव का प्रभाव भी कुछ राज्यों के कारोबार पर पड़ा है.

सर्वेक्षणों में ट्रंप की लोकप्रियता कमजोर

न्यूयॉर्क टाइम्स के एक सर्वेक्षण में संभावित मतदाताओं में से 36 प्रतिशत ने ट्रंप के नेतृत्व का समर्थन किया, जबकि 59 प्रतिशत ने असहमति जताई. सर्वेक्षण में 75 प्रतिशत लोगों ने देश की आर्थिक स्थिति को सामान्य या खराब बताया. अर्थव्यवस्था, पेट्रोल की कीमतों और विदेशी युद्धों जैसे मुद्दों पर भी कई मतदाताओं ने डेमोक्रेट्स को बेहतर विकल्प माना. ये आंकड़े बताते हैं कि जीवनयापन की बढ़ती लागत चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकती है.

रिपब्लिकन को बड़े चुनावी खर्च से उम्मीद

रिपब्लिकन पार्टी अपनी सीटें बचाने के लिए भारी चुनावी खर्च पर भी भरोसा कर रही है. एलन मस्क, ट्रंप समर्थक सुपर पॉलिटिकल एक्शन कमेटी और पार्टी संगठनों से बड़ी रकम खर्च की जा रही है. रिपब्लिकन रणनीतिकारों का मानना है कि कई राज्यों में मुकाबला अब भी करीबी है और खर्च से पार्टी को फायदा मिल सकता है. हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विज्ञापनों पर ज्यादा पैसा खर्च करने के बावजूद मतदाताओं की राय बदलना आसान नहीं है.

व्हाइट हाउस पर भ्रष्टाचार के आरोप भी मुद्दा

ट्रंप प्रशासन के खिलाफ भ्रष्टाचार और सत्ता का निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करने के आरोप भी रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं. ट्रंप के पहले कार्यकाल में काम कर चुके रिपब्लिकन रणनीतिकार मार्क शॉर्ट ने कहा कि व्हाइट हाउस से जुड़े लगातार सामने आ रहे खुलासे सीनेट के रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर दबाव बढ़ा रहे हैं.

नतीजे तय करेंगे कांग्रेस की ताकत

मध्यावधि चुनाव में अगर डेमोक्रेट्स सीनेट या प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करते हैं, तो वे ट्रंप प्रशासन की नीतियों की जांच और विरोध करने की अपनी क्षमता बढ़ा सकते हैं. दूसरी ओर, रिपब्लिकन बहुमत बचाने में सफल रहे, तो ट्रंप को कांग्रेस में अपनी नीतियां आगे बढ़ाने में अपेक्षाकृत आसानी होगी. इसलिए 3 नवंबर का चुनाव केवल सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि ट्रंप के शेष कार्यकाल की राजनीतिक दिशा तय करने वाला मुकाबला भी है.