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होर्मुज पर बढ़ा युद्ध का खतरा, अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर फिर किए ताबड़तोड़ हवाई हमले

अमेरिका ने ईरान की उन सैन्य क्षमताओं पर नया हमला किया है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाने के लिए किया जाता था. लगातार दूसरे दौर की सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा गया है.

AI
Shanu Sharma

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ हवाई हमलों का एक और दौर शुरू करते हुए उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जिन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक और नौसैनिक जहाजों के लिए खतरा माना जा रहा था. अमेरिकी सेना का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जहाजों की निर्बाध आवाजाही बनाए रखना है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को सही व्यवहार करने की चेतावनी देने के कुछ समय बाद यह सैन्य कार्रवाई की गई. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि राष्ट्रपति के निर्देश पर स्थानीय समयानुसार दोपहर तीन बजे हमलों का दूसरा चरण शुरू किया गया.

सेंटकॉम ने सोशल मीडिया पर शेयर किया पोस्ट

सेंटकॉम के अनुसार, इस अभियान में ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया जिनका उपयोग होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को धमकाने के लिए किया जा रहा था. अमेरिका का कहना है कि यह जलमार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसकी सुरक्षा बनाए रखना जरूरी है. इससे पहले बुधवार सुबह भी अमेरिकी सेना ने करीब 90 मिनट तक चले अभियान में ग्रेटर टुनब द्वीप स्थित तटीय रक्षा प्रणाली, क्रूज मिसाइल भंडारण केंद्र और प्रक्षेपण स्थलों पर सटीक हथियारों से हमला किया था. अमेरिकी सेना का दावा है कि इन हमलों के बाद व्यापारिक जहाजों पर हमला करने की ईरान की क्षमता और कमजोर हुई है.


ईरान के कई शहरों में धमाकों की खबर

हमलों के बाद ईरानी मीडिया ने दक्षिणी शहर अहवाज और चाबहार में विस्फोटों की सूचना दी. हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन धमाकों का सीधा संबंध अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से है या नहीं. ईरानी अधिकारियों के अनुसार, ताजा हमलों में सेना की एक बैरक को भी निशाना बनाया गया, जिसमें कम से कम सात सैनिकों की मौत हुई है. जबकि देश के विभिन्न हिस्सों में सैकड़ों लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही तो पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है. इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ने की आशंका है.