ईरान में तबाही मचाएगी अमेरिकी स्पेशल फोर्स? ट्रंप और इजरायल की 'सीक्रेट डील' से थर्राया तेहरान!

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध गहरा गया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने जमीनी हमले के संकेत दिए हैं. वहीं ईरान ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि उनकी सेना अमेरिकी सैनिकों का सामना करने के लिए तैयार है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता जा रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब खतरनाक मोड़ पर है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने जमीनी युद्ध की संभावनाओं को हवा दे दी है. फिलहाल आसमान और समंदर से हमले जारी हैं, लेकिन व्हाइट हाउस अब ईरान की धरती पर स्पेशल फोर्स उतारने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है. ट्रंप ने साफ किया है कि हालात नाजुक होने पर अमेरिकी सेना जमीन पर कदम रख सकती है.

व्हाइट हाउस में नए सैन्य विकल्पों पर चर्चा तेज हो गई है. माना जा रहा है कि हवाई और समुद्री हमलों से अमेरिका और इजरायल को वह सफलता नहीं मिली जिसकी उम्मीद थी. इसलिए अमेरिकी कमांडो का मुख्य निशाना ईरान के परमाणु ठिकानों को तबाह करना हो सकता है. इसके साथ ही जमीनी सैन्य दबाव के जरिए ईरान की सत्ता को कमजोर करने की कोशिश की जाएगी.

तेल और समुद्री मार्ग 

अमेरिकी रणनीतिकारों की नजर ईरान के तेल संसाधनों पर भी है. वे वेनेजुएला की तर्ज पर इन पर नियंत्रण चाहते हैं. इसके अलावा स्पेशल फोर्स की मदद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों पर नियंत्रण की कोशिश की जा सकती है. यह मार्ग दुनिया के करीब 20-25 फीसदी तेल व्यापार के लिए उपयोग होता है. अमेरिका इस मार्ग को नियंत्रित कर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पकड़ बनाना चाहता है.

ईरान का कड़ा रुख 

अमेरिका के इस बढ़ते दबाव को ईरान बखूबी समझ रहा है. ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जमीन पर हमला हुआ तो जवाब बेहद सख्त होगा. ईरानी सेना हर स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है. राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि यदि अमेरिका ने जमीनी हमला किया तो उनके सैनिक उनका इंतजार कर रहे हैं. ईरान ने साफ किया है कि वह अपनी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा.

ट्रंप का संभला बयान 

डोनाल्ड ट्रंप ने जमीन पर सैनिकों के इस्तेमाल से पूरी तरह इनकार नहीं किया है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी तैनाती की उम्मीद नहीं है. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जमीन पर सैनिकों का इस्तेमाल सिर्फ बहुत ठोस कारणों से ही किया जाएगा. फिलहाल अमेरिका यह देख रहा है कि हवाई हमलों का ईरान पर कितना और कैसा असर पड़ता है.