'ट्रंप से खिलवाड़ पड़ेगा भारी', सीजफायर के चंद घंटों बाद US के कड़े तेवर; ईरान को दी बड़ी चेतावनी
अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बनी है. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस नाजुक शांति का स्वागत किया है, लेकिन ट्रंप की ओर से कड़े समझौते या पूर्ण विनाश की चेतावनी भी दोहराई है.
नई दिल्ली: महीने भर से अधिक समय तक चले भीषण संघर्ष के बाद, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच 14 दिनों के युद्धविराम का ऐतिहासिक समझौता हुआ है. यह घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई सख्त समय-सीमा के समाप्त होने से ठीक पहले की गई है. जहां एक ओर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान से सद्भावनापूर्ण बातचीत का आग्रह किया है, वहीं दूसरी ओर तेहरान ने इसे युद्ध का अंतिम अंत मानने से इनकार किया है. इस बीच, एक रिफाइनरी पर हमले ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बुडापेस्ट की यात्रा के दौरान इस शांति-संधि का पुरजोर स्वागत किया. उन्होंने तेहरान को स्पष्ट संदेश दिया कि वे दीर्घकालिक समझौते के लिए ईमानदारी से बातचीत की मेज पर आएं. वेंस ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जिनके साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ किया जा सके. उनके अनुसार, ईरान को विनाश से बचने के लिए सद्भावना के साथ अमेरिकी प्रशासन के साथ मिलकर काम करना होगा.
ईरान की तेल रिफाइनरी पर हमला
शांति और युद्धविराम की घोषणा के चंद घंटों बाद ही ईरान के लावन द्वीप स्थित एक प्रमुख तेल रिफाइनरी पर हमले की खबर ने सबको चौंका दिया. ईरानी सरकारी टेलीविजन के अनुसार, हमले के कारण रिफाइनरी में भीषण आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए दमकलकर्मी लगातार संघर्ष करते रहे. हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. यह हमला किसने किया, इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है, लेकिन इसने समझौते की स्थिरता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
होर्मुज स्ट्रेट और जहाजों की सुरक्षा
इस दो हफ्तों के समझौते के तहत एक महत्वपूर्ण बिंदु होर्मुज स्ट्रेट का खुलना है. तेहरान इस जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाजों के सुरक्षित गुजरने की अनुमति देने पर सहमत हो गया है, जो वैश्विक तेल बाजार के लिए बड़ी राहत है. ईरान ने इस शांति-संधि को अपनी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश किया है. हालांकि, उनका मानना है कि हमलों को रोकना केवल एक अस्थायी प्रक्रिया है और युद्ध तब तक समाप्त नहीं होगा जब तक सभी शर्तों पर अंतिम मुहर नहीं लग जाती.
पाकिस्तान की मध्यस्थता और इस्लामाबाद वार्ता
क्षेत्र में शांति की वापसी के लिए पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ बनकर उभरा है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ हुई बातचीत को अत्यंत सार्थक और गर्मजोशी भरा बताया. पाकिस्तान ने इस सप्ताह के अंत में इस्लामाबाद में शांति वार्ता की मेजबानी करने का प्रस्ताव दिया है, जिसे ईरान ने स्वीकार कर लिया है. शहबाज शरीफ ने ईरानी नेतृत्व की समझदारी और दूरदर्शिता की सराहना की है, ताकि भविष्य में सैन्य टकराव को पूरी तरह टाला जा सके.
ट्रंप की चेतावनी और भविष्य की चुनौतियां
सीजफायर की यह घोषणा ट्रंप की उस समय-सीमा के साये में हुई है, जिसमें उन्होंने 'समझौता या विनाश' की बात कही थी. ईरानी नेतृत्व आगामी वार्ता को लेकर बहुत अधिक उत्साहित नहीं है और इसे केवल एक प्रक्रिया का हिस्सा मान रहा है. आने वाले दो हफ्ते दुनिया के इतिहास के लिए निर्णायक साबित होंगे. इस्लामाबाद में होने वाली चर्चा यह तय करेगी कि पश्चिम एशिया स्थायी शांति की ओर बढ़ेगा या फिर क्षेत्र को एक बार फिर भीषण तबाही का सामना करना पड़ेगा.