अमेरिका-हूतियों के बीच हुई डील? सऊदी अरब की बढ़ी चिंता, क्या यमन में बदल रहा समीकरण?

यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ संघर्ष कर रहे सऊदी अरब के लिए हालिया घटनाक्रम चिंता बढ़ाने वाला है. अमेरिका और ईरान समर्थित हूतियों के बीच ओमान में बातचीत की खबरों ने क्षेत्रीय समीकरण को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है. हालांकि, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है.

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Shanu Sharma

रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले वीकेंड ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिकी अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई. यह बातचीत ओमान की मध्यस्थता में होने की बात सामने आई है. हूती पक्ष की ओर से मोहम्मद अब्दुलसलाम और अब्देलमलिक अल-अजीरी जैसे वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए.

बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान हूतियों ने अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाने और 2025 में हुए सीजफायर का पालन करने का भरोसा दिया. हालांकि, इजरायली जहाजों को लेकर उनका रुख अलग बताया गया है. वहीं, सऊदी जहाजों और सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की धमकी जारी रहने की बात कही गई है.

क्या पर्दे के पीछे बनी कोई समझ?

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी अमेरिका और हूतियों के बीच सीधे संपर्क की बात कही है. उनके अनुसार, अमेरिका स्थिति पर नजर बनाए हुए है. फिलहाल वॉशिंगटन या हूती नेतृत्व ने किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं की है. हालांकि, बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच सीमित स्तर पर समझ बनने के संकेतों की चर्चा हो रही है.


पूर्व अमेरिकी राजनयिक नबील खौरी के मुताबिक, यह एक अनौपचारिक व्यवस्था का रूप ले सकती है. इसके तहत हूती अमेरिकी और अन्य अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को नुकसान नहीं पहुंचाने का आश्वासन दे सकते हैं, जबकि सऊदी जहाजों और उसके तेल परिवहन से जुड़े जहाजों पर खतरा बना रह सकता है.

अमेरिका के लिए भी ऐसी किसी समझ का रणनीतिक महत्व हो सकता है. ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के बीच वॉशिंगटन के लिए हूतियों के खिलाफ लंबे समय तक सैन्य अभियान जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. ऐसे में अमेरिकी जहाजों की सुरक्षा और लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को बनाए रखना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है.

सऊदी अरब के सामने बढ़ी चुनौती

इस घटनाक्रम का सीधा असर सऊदी अरब पर पड़ सकता है. सऊदी समर्थित यमनी लड़ाके हूतियों की पकड़ को निर्णायक रूप से कमजोर नहीं कर पाए हैं. सऊदी अरब की ओर से किए गए कई हवाई हमले भी हूती प्रभाव को पूरी तरह खत्म करने में सफल नहीं रहे. वहीं, पाकिस्तान और तुर्की ने यमन में सीधे सैन्य अभियान का हिस्सा बनने से इनकार किया है.

अमेरिका और ब्रिटेन ने भी हूती ठिकानों के खिलाफ सऊदी अरब की एयरस्ट्राइक की मांग को स्वीकार नहीं किया है. कुछ रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया है कि सऊदी अरब ने खुफिया सहायता के लिए इजरायल से संपर्क किया है. हालिया घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हूतियों ने पिछले सप्ताह यमन के लाल सागर क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास कई द्वीपों पर कब्जा करने का दावा किया गया. यह समुद्री मार्ग सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है.