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अमेरिकी के लिए खुशखबरी, फेडरल रिजर्व ने 0.25% घटा दी ब्याज दरें

US Interest Rates: फेडरल रिजर्व ने बुधवार को अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 0.25% घटाया, जो इस साल की तीसरी कटौती है. हालांकि, अगले साल दरों को कम करने की गति धीमी रहेगी. फेड के नीति निर्माता 2025 में सिर्फ दो बार दरों में 0.25% की कटौती का अनुमान लगा रहे हैं, जिससे कर्ज पर ब्याज दरों में ज्यादा कमी नहीं आएगी.

Shilpa Srivastava

US Interest Rates: फेडरल रिजर्व ने बुधवार को अपने प्राइम इंटरेस्ट रेट को 0.25% घटा दिया है जो इस साल की तीसरी कटौती है. हालांकि, इसने यह भी संकेत दिया कि अगले साल ब्याज दरों को पहले के मुकाबले स्लो स्पीड से घटाया जाएगा. आसान भाषा में समझें तो बहुत जल्दी-जल्दी ब्याज दर को घटाया नहीं जाएगा. 

यूएस फेडरल के 19 पॉलिसी मेकर अनुमान लगा रहे हैं कि वो 2025 में सिर्फ दो बार अपनी बेंचमार्क दर को 1/4% घटाएंगे, जबकि पहले सितंबर में इसका अनुमान चार कटौतियों का था. उनके नए लॉन्च से यह साफ होता है कि अगले साल लोगों को घरों के कर्ज, कार लोन, क्रेडिट कार्ड और अन्य तरह के लोन के लिए ब्याज दरों में बहुत ज्यादा कमी नहीं मिलेगी.

फेड अधिकारियों ने यह क्लियर किया है कि वे ब्याज दरों में कटौती की स्पीड स्लो कर रहे हैं क्योंकि उनकी बेंचमार्क दर एक ऐसे लेवल के करीब पहुंच रही है जिसे न्यूट्रल कहा जाता है, यानी वह लेवल जो अर्थव्यवस्था को न तो बढ़ावा देता है और न ही उसे रोकता है. इसे लेकर पॉलिसी मेकर यह मानते हैं कि वे इस स्तर के बहुत करीब हैं. फिलहाल, फेड की बेंचमार्क दर 4.3% है, जो हाल ही में की गई कटौती के बाद है.

इस साल फेड की दरों में कटौती ने दो साल से ज्यादा समय तक हाई रेट्स के बाद एक उलटफेर को दिखाया है जिसने बड़े लेवल पर इंफ्लेशन को कंट्रोल करने में मदद की है लेकिन अमेरिकी कंज्यूमर्स के लिए उधार लेना भी महंगा बना दिया. लेकिन अब, फेड को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि यह अर्थव्यवस्था के लिए एक सॉफ्ट लैंडिंग को पूरा करना चाहता है, जिससे ज्यादा रेट्स मंदी के बिना भी इंफ्लेशन को रोकने में कामयाब होती हैं. फेड के पसंदीदा गेज के अनुसार, अक्टूबर में एनुअल इंफ्लेशन 2.8% था, जो मार्च के समान ही था और अभी भी केंद्रीय बैंक के 2% के टारगेट से कुछ ऊपर है. 

हालांकि, यह कहा जा रहा है कि इससे अमेरिकी कंज्यूमर्स के लिए लोन लेना महंगा हो गया था महंगी हो गई थी. अब, फेड को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उसे एक "सॉफ्ट लैंडिंग" की कोशिश करनी है, यानी उच्च दरों से मुद्रास्फीति को नियंत्रित किया जाए, लेकिन इसके साथ ही मंदी न हो.

इसके अलावा, अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, जो यह दर्शाता है कि हाई रेट्स ने अर्थव्यवस्था को बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं किया है. इसके परिणामस्वरूप कुछ अर्थशास्त्रियों और फेड अधिकारियों ने यह तर्क दिया है कि ब्याज दरों को ज्यादा न घटाया जाए.

फेड के अधिकारियों ने यह भी कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों का असर तब तक साफ नहीं होगा जब तक कि उनके प्रस्तावों का ब्यौरा क्लियर न हो.