कभी इस पावर प्लांट में हर दिन जलता था 30,000 टन कोयला, अब हर दिन 1.5 लाख घरों को पहुंचा रहा स्वच्छ बिजली
अमेरिका के मिनेसोटा राज्य में स्थित शेरेको पावर प्लांट में कभी हर दिन 30,000 टन कोयला जलता था लेकिन अब यहां से स्वच्छ ऊर्जा निकली है.
अमेरिका में धीरे-धीरे कोयले से चलने वाले बिजलीघरों (Coal Plants) को बंद किया जा रहा है लेकिन इन्हें पूरी तरह खत्म करने के बजाय अब इनका इस्तेमाल नए तरीके से किया जा रहा है. अमेरिका के मिनेसोटा राज्य में स्थित शेरको (Sherco) पावर प्लांट इसका बड़ा उदाहरण बन गया है.
ऊर्जा कंपनी एक्सेल एनर्जी (Xcel Energy) ने इसी इलाके में शेरको सोलर प्रोजेक्ट का तीसरा चरण पूरा कर लिया है. अब यहां करीब 17 लाख सोलर पैनल लगे हैं, जो 710 मेगावाट बिजली पैदा करते हैं. यह मिनेसोटा का सबसे बड़ा सोलर प्लांट बन गया है और लगभग 1.5 लाख घरों को बिजली देने की क्षमता रखता है.
इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि नए सोलर प्लांट के लिए अलग से बिजली लाइन बनाने की जरूरत नहीं पड़ी. पहले जिस ट्रांसमिशन नेटवर्क से कोयला प्लांट बिजली भेजता था, अब उसी नेटवर्क का इस्तेमाल सोलर प्लांट कर रहा है. इससे नए प्रोजेक्ट को शुरू करने में लगने वाला समय और खर्च दोनों काफी कम हो गए.
Also Read
अमेरिका में नए बिजली प्रोजेक्ट को ग्रिड से जोड़ने में कई साल लग जाते हैं क्योंकि लाखों मेगावाट क्षमता वाले प्रोजेक्ट मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं लेकिन बंद हो रहे कोयला प्लांट के पुराने ग्रिड कनेक्शन का उपयोग करके यह प्रक्रिया एक साल से भी कम समय में पूरी की जा सकती है. यही वजह है कि इस मॉडल को ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.
दिलचस्प बात यह है कि शेरको का कोयला प्लांट अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है. इसके कुछ यूनिट पहले ही बंद किए जा चुके हैं, जबकि आखिरी यूनिट वर्ष 2030 तक काम करेगी. यानी अगले कुछ वर्षों तक इसी जगह से कोयला और सौर ऊर्जा दोनों एक साथ बिजली ग्रिड में भेजी जाएंगी.
भविष्य में इस सोलर प्रोजेक्ट का चौथा चरण भी शुरू करने की योजना है. इसके तहत 200 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़ी जाएगी. साथ ही बड़ी बैटरी स्टोरेज प्रणाली भी लगाई जाएगी, जिससे सौर ऊर्जा को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा. यदि योजना को मंजूरी मिलती है, तो यह परियोजना अमेरिका में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी.