ट्रंप और कार्नी की जुबानी जंग से बढ़ा तनाव, अमेरिका ने बोर्ड ऑफ पीस का न्योता लिया वापस
डोनाल्ड ट्रंप और मार्क कार्नी के बयानों ने अमेरिका और कनाडा के बीच तनाव को और गहरा कर दिया है. बोर्ड ऑफ पीस का निमंत्रण वापस लिया जाना इसी टकराव का संकेत है.
नई दिल्ली: अमेरिका और कनाडा के बीच रिश्तों में तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है.इस तनाव की वजह ट्रंप का वह बयान बना जिसमें उन्होंने कहा कि कनाडा अमेरिका की वजह से जिंदा है.
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस बयान का कड़ा जवाब दिया है. कार्नी ने कहा कि कनाडा अमेरिका की वजह से जिंदा नहीं है. हम कनाडाई हैं इसलिए कनाडा आगे बढ़ रहा है '. कार्नी ने एक नए विधायी सत्र से पहले क्यूबेक सिटी में एक राष्ट्रीय संबोधन में जवाब दिया, साथ ही उन्होंने दोनों देशों के बीच साझेदारी को भी स्वीकार किया.
ट्रंप ने क्या लिया एक्शन?
यह संबोधन नए विधायी सत्र से पहले दिया गया था. कार्नी ने अमेरिका के साथ पुराने रिश्तों को स्वीकार किया लेकिन आत्मसम्मान पर जोर दिया. इसके कुछ ही घंटों बाद डोनाल्ड ट्रंप ने जवाबी कदम उठाया. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कनाडा का एक निमंत्रण वापस लेने की घोषणा की. यह निमंत्रण ट्रंप की प्रस्तावित बोर्ड ऑफ पीस से जुड़ा था.
ट्रंप ने क्या लिखा?
यह बोर्ड वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए बनाया गया बताया जा रहा है. ट्रंप ने लिखा कि कनाडा को अब इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता नहीं दिया जाएगा. कनाडा सरकार के एक सूत्र ने कहा कि कनाडा इस बोर्ड के लिए कोई भुगतान नहीं करेगा. हालांकि इससे पहले कार्नी ने संकेत दिया था कि वह निमंत्रण स्वीकार कर सकते हैं.
दोनों नेताओं के बीच यह टकराव वैश्विक मंच पर भी दिखा.
स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान कार्नी ने बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि अमेरिका के नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था में दरार आ चुकी है. उनके इस बयान को ट्रंप की नीतियों से जोड़कर देखा गया.
ट्रंप और कार्नी ने एकदूसरे पर क्या कसा तंज?
ट्रंप ने बाद में कार्नी पर तंज कसते हुए कहा कि वह आभारी नहीं दिखे. कार्नी ने कहा कि दुनिया ज्यादा बंटी हुई हो गई है. उन्होंने माना कि पुराने गठबंधन बदल रहे हैं और कुछ टूट भी रहे हैं. कार्नी ने कहा कि कनाडा को अपनी संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा करनी होगी. उन्होंने रक्षा खर्च बढ़ाने की योजना का भी जिक्र किया. कार्नी ने कहा कि कनाडा लोकतंत्र के दौर में एक मिसाल बन सकता है.
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