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ईरान और US-इजरायल के बीच 45 दिन का युद्धविराम! क्या गुपचुप चल रही बातचीत?

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच कुछ मीडिएटर्स सुलह कराने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका पहला फेज 45 दिनों के युद्धविराम पर सहमत होना होगा.

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Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है. इस बीच खबर आ रही है कि अमेरिका और ईरान एक अस्थायी युद्धविराम तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके लिए सीक्रेट बातचीत जारी है. इस संघर्ष को रोकने का यह आखिरी मौका भी माना जा रहा है. बता दें कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक डेडलाइन दी है, जिसमें ट्रंप ने कहा है कि अगर उन्होंने होर्मुज नहीं खोला तो मंगलवार शाम तक बड़ी कार्रवाई हो सकती है. 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन देशों के बीच सुलह कराने वाले मीडिएटर्स दो-फेजेज में समझौता कराने की तैयारी कर रहे हैं. पहले फेज में दोनों पक्षों को 45 दिनों के युद्धविराम पर सहमत होना होगा. इसी दौरान युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने पर बातचीत की जाएगी. अगर सब सही चलता है तो युद्धविराम को और आगे बढ़ाया जा सकता है.

इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा: 

बातचीत के दौरान दो मुद्दे बेहद ही अहम होंगे, जिनमें ग्लोबल ऑयल शिपिंग के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और ईरान के समृद्ध यूरेनियम के भंडार से निपटना शामिल है. ये दोनों मामले दोनों देशों के लिए बेहद ही अहम हैं. हालांकि, ईरान के लिए बिना किसी समझौता हुए इन दोनों को छोड़ना बेहद ही मुश्किल माना जा रहा है. 


ईरान इस बात की पुख्ता गारंटी मांग रहा है कि युद्धविराम आसानी से नहीं टूटेगा. ईरानी अधिकारियों को डर है कि इस तरह का युद्धविराम आसानी से टूट सकता है, ठीक वैसे ही जैसा कि गाजा और लेबनान में हुआ था. ऐसे में मीडिएटर्स अमेरिका से कुछ ऐसे कदम उठाने के लिए कह रहे हैं कि जिससे ईरान को उस पर भरोसा हो सके. 

समझौता नहीं होता है तो क्या होगा?

इस समय का माहौल देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह बातचीत बहुत ज्यादा दबाव में हो रही है. अगर कोई समझौता नहीं होता है, तो अधिकारियों को डर है कि अमेरिका ईरान के बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर हमला कर सकता है. इसके जवाब में ईरान भी पीछे नहीं रहेगा और अमेरिका करारा जवाब देगा.