स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टोल को लेकर अमेरिका-ईरान आमने-सामने, मार्को रुबियो का बड़ा बयान
ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने के दावे को अमेरिका ने एक बार फिर खारिज कर दिया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और यहां किसी भी प्रकार का टोल स्वीकार नहीं किया जाएगा.
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगातार चर्चा का केंद्र रहा है. अब जब दोनों देशों के बीच शांति के लिए बातचीत की जा रही है, तब भी होर्मुज सेंटर ऑफ डिस्कशन बना हुआ है. युद्ध शुरू होने से पहले तक होर्मुज पर कोई भी शुल्क नहीं लगता था. लेकिन अब ईरान द्वारा लगातार दावा किया जा रहा है कि होर्मुज से गुजरने वाले सभी जहाजों को टोल देना पड़ेगा.
ईरान के इन दावों को एक बार फिर से नजरअंदाज करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को साफ कहा कि अमेरिका, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान द्वारा लगाए जाने वाले किसी भी टोल या शुल्क को स्वीकार नहीं करेगा. रुबियो ने यह बात स्विट्जरलैंड में शांति बातचीत के पहले दौरे के दौरान कही है. इसी दौरे के साथ दोनों देशों की 60 दिनों तक चलने वाली बातचीत की अवधि शुरू हो चुकी है.
क्या है ईरान की प्लानिंग?
ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद तेहरान ने समुद्री नाकेबंदी कर उस मार्ग से गुजरने वाले सभी जहाजों को रोक लिया. जिसकी वजह से वैश्विक तेल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित रहा. तेल के दामों में बढ़ोतरी हुई, जिसके कारण कई देशों को महंगाई का सामना करना पड़ा. ईरान को यह बात अच्छी तरह से समझ आ गई कि होर्मुज ही केवल एक ऐसा रास्ता है, जिससे पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच सकता है, साथ ही बड़ा मुनाफा भी कमा सकता है.
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इसी वजह से ईरान ने अब यह ऐलान किया है कि जब तक अमेरिका के साथ 60 दिनों तक बातचीत जारी है, तब तक नहीं लेकिन उसके बाद ईरान इस मार्ग पर टोल वसूलेगा. हालांकि अमेरिका द्वारा लगातार इस दावे को खारिज किया जा रहा है. वॉशिंगटन का कहना है कि ऐसा संभव नहीं है. लेकिन अगर ऐसा होता है तो इसका असर सबसे ज्यादा उन देशों पर पड़ेगा जो तेल के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं. जिसमें भारत और चीन का नाम सबसे ऊपर है.
ईरान और अमेरिका के अलग-अलग दावे
अमेरिका द्वारा लगातार ईरान के इस दावे को खारिज किया जा रहा है. मार्को रुबियो ने कहा कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है. किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर टोल या शुल्क लेने की अनुमति नहीं है. हालांकि ईरान अलग दावे कर रहा है. तेहरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने कुछ दिनों पहले यह दावा किया था कि होर्मुज अब कभी भी युद्ध पूर्व स्थिति में वापस नहीं लौटेगा. हालांकि अभी रास्ता खोले जाने के बाद जहाजों का आवागमन शुरू हो गया है. नाकेबंदी के कारण फंसे सैकड़ों जहाज अब होर्मुज पार कर रहे हैं. ईरान और अमेरिका अभी 60 दिनों तक बातचीत कर युद्ध पर विराम लगाने की कोशिश करेंगे, लेकिन अगर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बनी तो फिर से युद्ध शुरू हो सकता है. इस बात की चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही दे चुके हैं.