छात्रों के कट्टरपंथी बनने का डर! मुस्लिम देश ने इस देश में पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप पर लगाई रोक
यूएई ने ब्रिटेन में पढ़ाई के लिए छात्रों की स्कॉलरशिप पर रोक लगा दी है. सरकार को आशंका है कि ब्रिटिश विश्वविद्यालयों में मौजूद मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े प्रभाव छात्रों को कट्टरपंथ की ओर ले जा सकते हैं.
नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात ने उच्च शिक्षा को लेकर एक अहम और संवेदनशील फैसला लिया है. यूएई सरकार ने ब्रिटेन जाकर पढ़ाई करने वाले छात्रों की सरकारी स्कॉलरशिप पर रोक लगा दी है. इस फैसले की जड़ में सुरक्षा और वैचारिक प्रभावों को लेकर बढ़ती चिंता बताई जा रही है. यूएई का मानना है कि ब्रिटिश शिक्षा संस्थानों में कुछ ऐसे तत्व सक्रिय हैं, जो छात्रों को कट्टर विचारधाराओं की ओर प्रभावित कर सकते हैं.
यूएई ने ब्रिटिश विश्वविद्यालयों के लिए स्कॉलरशिप पर रोक पिछले साल जून में ही लगा दी थी. हालांकि यह फैसला अब जाकर सार्वजनिक बहस का विषय बना है. ब्रिटिश अखबार द फाइनेंशियल टाइम्स और द टाइम्स की रिपोर्ट्स के बाद यह मुद्दा चर्चा में आया. इन रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएई की उच्च शिक्षा मंत्रालय ने विदेशी संस्थानों की नई सूची जारी की, जिसमें ब्रिटेन के विश्वविद्यालय शामिल नहीं हैं.
बदली हुई सूची में कौन-कौन से देश शामिल?
यूएई की संशोधित स्कॉलरशिप सूची में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और इजरायल के शैक्षणिक संस्थानों को जगह दी गई है. लेकिन ब्रिटेन, जो विश्व स्तरीय शिक्षा का बड़ा केंद्र माना जाता है, इस सूची से पूरी तरह बाहर है. जब ब्रिटिश अधिकारियों ने इस पर सवाल उठाया, तो यूएई के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकार नहीं चाहती कि विदेश में पढ़ते समय उसके छात्र किसी भी तरह के कट्टरपंथी प्रभाव में आएं.
मुस्लिम ब्रदरहुड को लेकर यूएई की चिंता
फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार यूएई की मुख्य चिंता मुस्लिम ब्रदरहुड संगठन को लेकर है. यूएई पहले ही इस संगठन को आतंकवादी घोषित कर चुका है. उसका मानना है कि ब्रिटिश विश्वविद्यालयों और कैंपस वातावरण में ब्रदरहुड से जुड़े वैचारिक नेटवर्क मौजूद हैं. यूएई लंबे समय से यूरोपीय देशों से इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग करता रहा है, लेकिन ब्रिटेन ने अब तक ऐसा करने से इनकार किया है.
ब्रिटेन का रुख और 2015 की समीक्षा
ब्रिटिश सरकार ने 2015 में मुस्लिम ब्रदरहुड को लेकर एक विस्तृत समीक्षा करवाई थी. यह समीक्षा सऊदी अरब की चेतावनियों के बाद शुरू की गई थी. रिपोर्ट में कहा गया कि संगठन के विचार ब्रिटिश मूल्यों से मेल नहीं खाते. हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया कि ब्रिटेन में या ब्रिटेन के खिलाफ किसी आतंकी गतिविधि में मुस्लिम ब्रदरहुड की सीधी भूमिका सामने नहीं आई. इसी आधार पर ब्रिटेन ने प्रतिबंध लगाने से इनकार किया.
मुस्लिम ब्रदरहुड का इतिहास और वैश्विक स्थिति
मुस्लिम ब्रदरहुड की स्थापना 1928 में मिस्र में हसन अल-बन्ना ने की थी. इसका उद्देश्य इस्लामी सिद्धांतों को सामाजिक और राजनीतिक जीवन में लागू करना रहा है. अरब स्प्रिंग के बाद यह संगठन मिस्र में सत्ता में भी आया, लेकिन 2013 में सैन्य तख्तापलट के बाद इसे प्रतिबंधित कर दिया गया. जनवरी 2026 तक मिस्र, सऊदी अरब, यूएई, रूस और जॉर्डन जैसे देश इसे आतंकी संगठन घोषित कर चुके हैं.
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