'भारत 175% टैरिफ लगाता है, US के साथ हो रहा अन्याय', नई किताब में ट्रंप के हवाले से किया गया दावा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक बंद कमरे की बैठक से जुड़े नए खुलासों ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर बहस छेड़ दी है. एक नई किताब में दावा किया गया है कि ट्रंप ने भारत पर अत्यधिक टैरिफ लगाने का आरोप लगाया था.
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिशों के बीच एक नई किताब ने राजनीतिक और आर्थिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है. किताब के अनुसार, मार्च 2025 में हुई एक अहम बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और चीन पर अमेरिका के साथ अनुचित व्यापार व्यवहार करने का आरोप लगाया था. यह बैठक सेमीकंडक्टर उद्योग, वैश्विक सप्लाई चेन और अमेरिकी विनिर्माण को लेकर आयोजित की गई थी.
न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकारों मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान की नई किताब में दावा किया गया है कि 10 मार्च 2025 को हुई बैठक में ट्रंप ने कहा था कि भारत अमेरिका पर 175 प्रतिशत तक टैरिफ लगाता है. बैठक में एलन मस्क, हॉवर्ड लटनिक और कई प्रमुख टेक कंपनियों के प्रमुख मौजूद थे. चर्चा का मुख्य विषय अमेरिका में चिप निर्माण को बढ़ावा देना था.
सेमीकंडक्टर को लेकर ट्रंप की चिंता
बैठक के दौरान ट्रंप ने ताइवान के वैश्विक सेमीकंडक्टर उत्पादन में दबदबे पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि चिप उद्योग का बड़ा हिस्सा ताइवान में केंद्रित है. इस पर एलन मस्क ने चेतावनी दी कि यदि ताइवान को लेकर कोई बड़ा संकट पैदा होता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है. मस्क ने अमेरिका की सीमित चिप निर्माण क्षमता पर भी चिंता व्यक्त की.
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भारत के टैरिफ आंकड़ों पर विवाद
किताब में यह भी बताया गया है कि बाद में हुई एक आर्थिक समीक्षा बैठक में ट्रंप और कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लटनिक के बीच भारत के टैरिफ आंकड़ों को लेकर तीखी बहस हुई. ट्रंप का मानना था कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़े वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाते. उन्होंने अपनी टीम से अधिक सटीक और विस्तृत जानकारी मांगी.
टैरिफ रणनीति और व्यापार वार्ता
इन चर्चाओं के बीच ट्रंप प्रशासन ने कई देशों पर टैरिफ बढ़ाने की रणनीति अपनाई. भारत पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाने की बात सामने आई. हालांकि दोनों देशों ने फरवरी 2025 में एक व्यापार ढांचे पर सहमति बनाई थी, जिसके तहत कुछ उत्पादों पर शुल्क कम करने की दिशा में काम शुरू हुआ था.
24 जुलाई से पहले समझौते की चुनौती
अब भारत और अमेरिका 24 जुलाई से पहले व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं. इस तारीख के बाद अधिकांश आयातित वस्तुओं पर सामान्य एमएफएन टैरिफ दरें फिर लागू हो सकती हैं. ऐसे में दोनों देशों के लिए यह वार्ता बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते की सफलता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभदायक साबित हो सकती है.