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ट्रंप ने ईरान के साथ फिर शांति वार्ता के दिए संकेत, पाकिस्तान में ही होगी बातचीत!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ पाकिस्तान में दोबारा शांति वार्ता शुरू होने के प्रबल संकेत दिए हैं. पहले दौर की 21 घंटे लंबी मैराथन बैठक के बेनतीजा रहने के बाद अब दूसरे दौर की कूटनीतिक तैयारी तेज हो गई है.

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Kanhaiya Kumar Jha

वॉशिंगटन: विश्व की दो महाशक्तियों के बीच गहराते युद्ध के बादलों को कम करने की दिशा में एक बड़ी और सकारात्मक कूटनीतिक खबर सामने आ रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ एक बार फिर सीधी बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के हवाले से ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि अगले दो दिनों के भीतर इस दिशा में कोई बड़ा और महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिल सकता है.

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी साफ किया है कि दूसरे दौर की यह उच्च-स्तरीय बातचीत भी पाकिस्तान की सरजमीं पर ही आयोजित होने वाली है. ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन फिर से वार्ता की मेज पर जाने के लिए पूरी तरह इच्छुक और गंभीर है. गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई थी. हालांकि, करीब 21 घंटे तक चली उस ऐतिहासिक मैराथन बैठक में कोई अंतिम हल नहीं निकल पाया था, लेकिन इसने भविष्य की संभावनाओं के द्वार खोल दिए थे.

फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तारीफ

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प पहलू राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा पाकिस्तान के आर्मी चीफ, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की जमकर की गई सराहना है. ट्रंप ने मुनीर की तारीफ करते हुए कहा कि वह बातचीत की टेबल पर शानदार प्रदर्शन कर रहे थे और उनकी कार्यशैली अत्यंत प्रभावशाली है. मुनीर की इसी कूटनीतिक कुशलता के कारण ही ट्रंप प्रशासन एक बार फिर पाकिस्तान के साथ मिलकर आगे बढ़ने का इच्छुक है. इसके अलावा, पाकिस्तानी अधिकारी भी दूसरे दौर की मध्यस्थता के लिए पर्दे के पीछे से तैयारियां कर रहे हैं.

समझौते की ओर बढ़ते कदम और 1979 के बाद पहली पहल 

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस दिशा में सकारात्मक संकेत दिए हैं और उनके मुताबिक ईरान के साथ समझौते की बातचीत कुछ आगे बढ़ी है. वहीं, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी उम्मीद जताई है कि अगले दौर की वार्ता जल्द ही संपन्न होगी.  उल्लेखनीय है कि शनिवार को हुई 21 घंटे की वार्ता 1979 के बाद अपनी तरह की पहली ऐसी पहल थी जिसमें दोनों पक्षों के शीर्ष अधिकारियों ने आमने-सामने शिरकत की थी. फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें अगले 48 घंटों पर टिकी हैं, जो पश्चिम एशिया में शांति का भविष्य तय कर सकते हैं.