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India Daily

'मुझे गलत आंकड़े मत दो', भारत के टैरिफ पर ट्रंप और टीम में हुई थी बहस; नई किताब में हुआ खुलासा

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल पर लिखी नई किताब में दावा किया गया है कि भारत के टैरिफ को लेकर उनकी अपनी टीम से तीखी बहस हुई थी. ट्रंप ने अधिकारियों द्वारा पेश किए गए आंकड़ों पर सवाल उठाए और उन्हें गलत बताया.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'मुझे गलत आंकड़े मत दो', भारत के टैरिफ पर ट्रंप और टीम में हुई थी बहस; नई किताब में हुआ खुलासा
Courtesy: pintrest

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल से जुड़ा एक नया खुलासा सामने आया है. पत्रकार मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान की किताब Regime Change: Inside the Imperial Presidency of Donald Trump में बताया गया है कि भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर लगाए जाने वाले टैरिफ को लेकर ट्रंप और उनके शीर्ष अधिकारियों के बीच गंभीर मतभेद थे. किताब के अनुसार, ट्रंप को भरोसा नहीं था कि उन्हें दिए जा रहे आधिकारिक आंकड़े सही हैं. इस मुद्दे ने बाद में दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को भी प्रभावित किया.

टैरिफ आंकड़ों पर ट्रंप का गुस्सा

किताब के मुताबिक, व्हाइट हाउस में हुई एक अहम बैठक के दौरान ट्रंप ने भारत और चीन जैसे देशों द्वारा अमेरिकी वस्तुओं पर लगाए गए शुल्कों की विस्तृत जानकारी मांगी थी. जब अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अधिकारियों ने आधिकारिक आंकड़े पेश किए, तो ट्रंप उनसे संतुष्ट नहीं हुए. बताया गया है कि उन्होंने अधिकारियों पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया और कहा कि वास्तविक टैरिफ दरें कहीं अधिक हैं. ट्रंप का मानना था कि भारत कुछ अमेरिकी उत्पादों पर 175 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा शुल्क वसूलता है, जबकि अधिकारियों के आंकड़े इससे काफी कम थे.

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में बढ़ता तनाव

उस समय भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक मुद्दों पर तनाव पहले से ही बढ़ रहा था. अमेरिकी प्रशासन लगातार यह आरोप लगाता रहा कि भारत की शुल्क व्यवस्था विदेशी कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण है. अमेरिका का तर्क था कि भारतीय बाजार में प्रवेश करने के दौरान उसके निर्यातकों को कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है. इसी वजह से ट्रंप प्रशासन भारत की व्यापार नीतियों की खुलकर आलोचना करता रहा. यह विवाद धीरे-धीरे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक बड़ा मुद्दा बन गया.

टैरिफ फैसलों ने बढ़ाई कूटनीतिक चुनौती

किताब में वर्णित घटनाक्रम के बाद ट्रंप प्रशासन ने भारत से आने वाले कुछ उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया. बाद में रूसी तेल खरीद को लेकर एक और 25 प्रतिशत टैरिफ जोड़ा गया. इससे कुछ भारतीय आयातों पर कुल अमेरिकी शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया. इस फैसले ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक चर्चाओं को प्रभावित किया. विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों ने व्यापार वार्ताओं को और जटिल बना दिया था.

समझौते की दिशा में आगे बढ़े दोनों देश

मतभेदों के बावजूद भारत और अमेरिका ने आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी रखी. दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा तैयार करने पर काम शुरू किया, जिसका उद्देश्य बाजार पहुंच को आसान बनाना और व्यापारिक बाधाओं को कम करना था. बाद में अमेरिका ने अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क हटाने का फैसला भी किया. अब दोनों देशों के अधिकारी लंबित मुद्दों को सुलझाकर समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं. हालिया बैठकों में इसी लक्ष्य को लेकर चर्चा तेज हुई है.