'जिन गोलियों से भून दिए बच्चे, उनका भी मांगा जा रहा पैसा', भारत में रह रहे ईरानियों ने सुनाई तेहरान की दास्तान

खाकी ने बताया कि ईरानी लोगों के अनुसार, खामेनेई सरकार के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब थकान और अस्तित्व की लड़ाई में तब्दील हो गए हैं.

@MarioNawfal
Sagar Bhardwaj

ईरान की राजधानी तेहरान के अस्पताल लाशों से भरे पड़े हैं, मशीनों को सड़कों से शवों को हटाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. मानवता को शर्मसार करने वाली बात ये है वहां परिवारों को उन गोलियों का हर्जाना चुकाने को मजबूर किया जा रहा है जिन गोलियों ने उनके बच्चों की जान ले ली. भारत में रह रहे ईरान के लोग कह रहे हैं कि उन्हें अपने प्रियजनों से ऐसी ही खबरें मिल रही हैं.

दक्षिण भारत में रहने वाली तेहरान के मूल निवासी अबगिन खाकी ने बताया कि मंगलवार को उनकी अपने माता-पिता से बात हुई थी. वे सुरक्षित हैं और लेकिन उन्होंने कहा कि उनके चारों तरफ लाशें ही लाशें हैं.

शवों से भरे पड़े हैं अस्पताल

उन्होंने कहा, 'मेरे पिता ने कहा कि अस्पताल शवों से भरे पड़े हैं. प्रशासन सड़कों को साफ करने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल कर रहे हैं. यही नहीं जब तक की लोग 3,60,000 नहीं देंगे तब तक परिवारों को उनके मृतकों के शव तक नहीं दिए जा रहे. यही नहीं कुछ अधिकारी गोली के पैसे भी मांग रहे हैं. कौन सा राज्य अपने लोगों के साथ ऐसा करता है?'

खाकी ने बताया कि ईरानी लोगों के अनुसार, खामेनेई सरकार के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब थकान और अस्तित्व की लड़ाई में तब्दील हो गए हैं. उन्होंने कहा कि लोग अंडे और ब्रेड के लिए भी मोहताज हैं. हमारे माता पिता की पीढ़ी को इस बात का पछतावा है कि जब वो बोल सकते थे तब उन्होंने आवाज नहीं उठाई. अब वे हमारा समर्थन कर रहे हैं. हम चाहते हैं कि यह सरकार हर हाल में चली जाए. बहार घोरबानी जैसी अन्य महिलाओं के लिए, जो हाल ही में फिनलैंड से भारत गई हैं, डर चुप्पी में छिपा हुआ है.

नहीं जानती माता-पिता जिंदा हैं या नहीं

शुक्रवार को जब थोड़े समय के लिए अंतरराष्ट्रीय फोन करने की अनुमति दी गई, घोरबानी ने अपने परिजनों से बात की, लेकिन मात्र 30 सेकेंड ही उनकी बात हो सकी. वह नहीं जानती कि तेहरान में उनके माता-पिता सुरक्षित हैं या नहीं. उन्होंने कहा, 'शाम तीन बजे से सुबह तक वहां हर जगह कर्फ्यू रहता है.' उन्होंने कहा कि पुलिस सड़क पर है लेकिन जनता भी सड़क पर है. वे जानते हैं कि वे मर सकते हैं ल लेकिन वे फिर भी घर से बाहर निकल रहे हैं. सुरक्षा बलों ने पेलेट गन का इस्तेमाल बंद कर दिया है और अब वो असली गोली चला रहे हैं. वे किसी को नहीं बख्श रहे चाहे महिलाएं हों या बच्चे.

भारतीयों का समर्थन चाहते हैं

बुधवार को ईरान का एक समूह नई दिल्ली स्थित दूतावास के बाहर इकट्ठा हुआ. वे 1979 से पहले का शेर और सूरज के चिह्न वाला ईरान का राष्ट्रीय झंडा लहरा रहे थे. यह विरोध जताने का एक छोटा सा तरीका था लेकिन उन्होंने इसे महत्वपूर्ण बताया. एक प्रदर्शनकारी मोहम्मद ने फोन पर बताया कि हम यहां अपने भाइयों और अपनी बहनों के लिए बोलने के लिए आए हैं. जो हो रहा है हम उसे भारतीयों को बताना चाहते हैं और उनका समर्थन चाहते हैं.