नई दिल्लीः पांच देशों के समूह ब्रिक्स के विस्तार होने का रास्ता तय हो गया है. साउथ अफ्रीकी प्रेसिडेंट के मुताबिक, मिस्र, इथियोपिया, सऊदी अरब, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), अर्जेंटीना का इस संगठन में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है. इन सभी देशों के साथ भारत के संबंध बेहद अच्छे हैें. 1 जनवरी 2024 से ये देश ब्रिक्स के स्थायी सदस्य बन जाएंगे. इस संगठन के विस्तार के लिए क्षेत्रीय संतुलन का खासा ध्यान रखा गया है. चीन इसमें अपने समर्थक देशों को शामिल कराना चाहता था. जिससे इस संगठन को जी 7 देशों के खिलाफ खड़ा किया जा सके. भारत ने अपनी डिप्लोमेसी से चीन की इस चाल को नाकाम कर दिया. इसमें भारत का साथ रूस ने दिया.
सभी देशों ने जताई सहमति
ब्रिक्स मे शामिल होने वाले नए देशों के साथ भारत के बहुत पुराने और बेहतरीन संबंध हैं. दक्षिण अफ्रीकी अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत और चीन के सीमा विवाद के बाद भी सदस्य देश इसके विस्तार को लेकर सहमत हो गए है. ब्रिक्स देशों में शामिल होने के लिए दुनियाभर से 40 से ज्यादा देशों ने इच्छा जाहिर की थी.रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब और मिस्र के नाम पर ब्रिक्स के सभी पांचों सदस्य देश सहमत थे.
ईरान का रूस ने खुलकर किया समर्थन
साउथ अफ्रीका ने यूएई और ईरान का समर्थन किया. इंडोनेशिया ने अंतिम मौके पर इसका सदस्य बनने से मना कर दिया.रूस ने ईरान की सदस्यता का खुलकर समर्थन किया. जिसे बाद में ब्राजील से भी अनुमति मिल गई. ईरान को शामिल करने को लेकर लंबे समय तक बहस चल रही है. ईरान के ऊपर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध इस संगठन के विस्तार के लिए बाधा बन सकते हैं.
सऊदी कर सकता है उलटफेर
सऊदी अरब इस समूह का नया सदस्य बना है. ब्रिक्स की सदस्यता के मद्देनजर सऊदी अरब के कई नेता साउथ अफ्रीका बुधवार सुबह ही पहुंच गए थे. सऊदी अरब के हाल के कुछ समय में अमेरिका के साथ संबंधों में कड़वाहट देखी गई है. सऊदी अरब से इन दिनों चीन की नजदीकी बढ़ रही है. जो इस संगठन में बड़ा उलटफेर करने की क्षमता रखता है. हालांकि भारत के साथ सऊदी अरब के संबंध बेहद मधुर हैं.
रूस की ओर से लोवरोव ने लिया भाग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ब्राजीली राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा, पीएम मोदी और साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने इस समिट के दौरान मुलाकात की. यूक्रेन में युद्ध के कारण इटरनेशनल कोर्ट ने पुतिन के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया था. जिस वजह से वे सम्मेलन में भाग लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका नहीं आए. रूस की ओर से विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव हिस्सा ले रहे हैं. रामाफोसा ने कहा कि सभी सदस्य देशों ने इस संगठन के विस्तार का समर्थन किया है.
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