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भारत में मॉक ड्रिल से कांपा पाकिस्तान! जंग की तैयारी देख पाक PM शहबाज शरीफ पहुंचे ISI हेडक्वार्टर, तीनों सेनाओं के चीफ रहे मौजूद

भारत की इस सैन्य तैयारियों ने पाकिस्तान में चिंता बढ़ा दी है. जहां दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण माहौल में यह ड्रिल क्षेत्रीय स्थिरता पर असर डाल सकता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर नजर रखे हुए है.

X@PakPMO
Mayank Tiwari

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है, क्योंकि भारत ने 7 मई को राष्ट्रव्यापी सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल आयोजित करने की घोषणा की है. इससे एक दिन पहले, मंगलवार (6 मई) को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) मुख्यालय का दौरा किया और एक महत्वपूर्ण बैठक की. इस बैठक में भारत के साथ तनाव को देखते हुए पारंपरिक सैन्य खतरों और पाकिस्तान की तैयारियों पर विस्तृत चर्चा हुई.

ISI मुख्यालय में उच्च स्तरीय बैठक

स्थानीय मीडिया के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने बयान जारी कर बताया कि बैठक में उप-प्रधानमंत्री इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और तीनों सेनाओं के प्रमुख शामिल थे. बयान में कहा गया, “इस दौरे में मौजूदा सुरक्षा स्थिति की बेहतर जानकारी दी गई, खासतौर पर पूर्वी सीमा पर भारत की आक्रामक और उकसावे वाली गतिविधियों के मद्देनजर पारंपरिक सैन्य खतरे को लेकर तैयारियों पर जोर दिया गया.” शहबाज शरीफ और उनके प्रतिनिधिमंडल को क्षेत्रीय सुरक्षा, बदलते खतरों, हाइब्रिड युद्ध रणनीतियों और आतंकवादी नेटवर्क पर जानकारी दी गई.

शहबाज शरीफ ने ISI की भूमिका की सराहना

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ISI की प्रशंसा करते हुए इसे राष्ट्रीय हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा, “पाकिस्तानी सेना दुनिया की सबसे पेशेवर और डिसिप्लेन सेनाओं में से एक है. पूरा देश हमारे बहादुर सुरक्षाबलों के साथ खड़ा है.” बैठक में राष्ट्रीय सतर्कता बढ़ाने, सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और संचालन क्षमता को मजबूत करने पर बल दिया गया ताकि पाकिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की जा सके.

भारत का सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल

बता दें कि, भारत सरकार 7 मई को देश के 244 जिलों में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल आयोजित कर रही है. इसका उद्देश्य युद्ध, मिसाइल हमलों या हवाई बमबारी जैसी आपात स्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखना है. इस अभ्यास में हवाई हमले के सायरन, शहरों में ब्लैकआउट, नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना और आपातकालीन टीमों की सक्रियता शामिल होगी. इसका लक्ष्य नागरिकों में जागरूकता बढ़ाना और आपदा के समय नुकसान को कम करना है.