Japan Earthquake: जापान के बोनिन द्वीप समूह के आसपास धरती कांपने से भूकंप की तीव्रता को लेकर चिंता बढ़ गई है. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 63 मापी गई. इस स्तर का भूकंप कुछ परिस्थितियों में इमारतों और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचा सकता है. हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस घटना से जुड़ी जनहानि, संपत्ति के नुकसान या अन्य प्रभावों का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है.
भूकंप आने की प्रमुख वजह धरती की ऊपरी परत में मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल है. पृथ्वी की सतह कई बड़ी और छोटी प्लेटों में बंटी हुई है, जो लगातार गति करती रहती हैं. जब ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं, दूर खिसकती हैं या एक-दूसरे के नीचे जाने लगती हैं, तो उनके आसपास दबाव जमा हो सकता है. दबाव अचानक निकलने पर धरती में कंपन पैदा होता है, जिसे हम भूकंप के रूप में महसूस करते हैं.
धरती के भीतर मौजूद चट्टानों और प्लेटों के किनारों पर लंबे समय तक दबाव बन सकता है. जब यह दबाव चट्टानों की सहन करने की क्षमता से अधिक हो जाता है, तो वे टूट सकती हैं या अपनी जगह से खिसक सकती हैं. इस प्रक्रिया में जमा ऊर्जा बाहर निकलती है और भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं. यही तरंगें धरती की सतह तक पहुंचकर झटके महसूस कराती हैं. भूकंप का असर उसकी तीव्रता के साथ-साथ गहराई और स्थानीय भूगर्भीय परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है.
भूकंप की तीव्रता बताने के लिए रिक्टर स्केल का नाम आम तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. कम तीव्रता वाले भूकंप कई बार लोगों को महसूस नहीं होते, जबकि अधिक तीव्रता वाले भूकंप नुकसान पहुंचा सकते हैं. हालांकि, किसी भूकंप से होने वाली तबाही केवल उसकी तीव्रता से तय नहीं होती. भूकंप कितनी गहराई पर आया, आबादी कितनी घनी है और इमारतें कितनी मजबूत हैं, इन सभी बातों की अहम भूमिका होती है.
जापान में आए भूकंप से पहले शनिवार, 24 अक्टूबर को दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित वानुआतू द्वीपसमूह में भी 71 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, यह भूकंप सुबह 8 बजकर 1 मिनट पर आया था. वानुआतू कई द्वीपों से मिलकर बना एक देश है. हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस भूकंप से हुए नुकसान का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है.