चुनौती, धमकी और प्लान... दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति का जापान दौरा अहम क्यों माना जा रहा?
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग जापान का दौरा करेंगे. यह बैठक दोनों देशों के लिए इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि ऐतिहासिक कारणों से जापान और दक्षिण कोरिया के रिश्ते लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे हैं. हालांकि बीते कुछ वर्षों में दोनों देशों ने संवाद और सहयोग बढ़ाने की कोशिश की है.
नई दिल्ली: दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग जापान का दौरा करेंगे. इस दौरे को बहुत अहम व महत्वपूर्ण माना जा रहा है. जापान की पीएम सनाए ताकाइची मंगलवार को अपने गृह नगर नारा में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग की मेजबानी कर सकती हैं.
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति का अहम दौरा
यह उच्च स्तरीय शिखर बैठक ऐसे समय हो रही है, जब पूर्वी एशिया में भू-राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं और चीन की बढ़ती भूमिका क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर रही है. इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य जापान और दक्षिण कोरिया के रिश्तों को अधिक मजबूत, स्थिर और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप बनाना है.
संवाद और सहयोग बढ़ाने का प्रयास
यह बैठक दोनों देशों के लिए इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि ऐतिहासिक कारणों से जापान और दक्षिण कोरिया के रिश्ते लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे हैं. हालांकि बीते कुछ वर्षों में दोनों देशों ने संवाद और सहयोग बढ़ाने की कोशिश की है. राष्ट्रपति ली की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब उन्होंने एक सप्ताह पहले ही चीन का दौरा किया था. उस दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सियोल के साथ रिश्तों को बेहतर बनाने के संकेत दिए थे. यह घटनाक्रम जापान और चीन के बीच चल रहे तनाव की पृष्ठभूमि में खास महत्व रखता है.
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद पहली बैठक
गौर करने वाली बात यह भी है कि पिछले नवंबर में प्रधानमंत्री ताकाइची ने बयान दिया था कि अगर चीन ताइवान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करता है, तो जापान के हस्तक्षेप को सही ठहराया जा सकता है. इसी कारण यह शिखर सम्मेलन क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसके अलावा, यह यात्रा उस समय हो रही है जब वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को अमेरिका द्वारा गिरफ्तार किया गया है. मादुरो जापान और दक्षिण कोरिया दोनों के साझा सहयोगी रहे हैं, जिससे वैश्विक राजनीति का दबाव भी इस मुलाकात पर महसूस किया जा रहा है.
जापानी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
जापानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री बनने के बाद यह सनाए ताकाइची की पहली पूर्ण द्विपक्षीय शिखर बैठक है. अक्टूबर में दक्षिण कोरिया के ग्योंगजू शहर में हुए एशिया-पैसिफिक आर्थिक सहयोग शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ली ने नारा में मुलाकात का प्रस्ताव रखा था.
'रिश्तों को मजबूत करना बेहद जरूरी'
बैठक के दौरान दोनों नेता व्यापार, चीन से जुड़ी रणनीतिक चुनौतियों, उत्तर कोरिया की परमाणु और मिसाइल धमकियों, और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे. जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी ने कहा है कि मौजूदा हालात में जापान और दक्षिण कोरिया के रिश्तों को मजबूत करना बेहद जरूरी है. उन्होंने यह भी जोर दिया कि जापान-अमेरिका-दक्षिण कोरिया के बीच त्रिपक्षीय सहयोग को और मजबूत किया जाना चाहिए.
प्रसिद्ध मंदिर का दौरा करेंगे दोनों नेता
बताया जा रहा है कि बुधवार को दोनों नेता नारा स्थित प्रसिद्ध होरियू-जी मंदिर का दौरा करेंगे. यह मंदिर दुनिया की सबसे पुरानी लकड़ी की संरचनाओं में से एक माना जाता है और इसका संबंध सातवीं और आठवीं शताब्दी से है. यह स्थल कोरियाई प्रायद्वीप, खासकर प्राचीन बैकजे साम्राज्य के माध्यम से जापान में बौद्ध धर्म के प्रसार का प्रतीक है. अपनी यात्रा के अंत में राष्ट्रपति ली जापान में रहने वाले दक्षिण कोरियाई समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे और फिर स्वदेश लौट जाएंगे.