'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए अपने युद्धपोत भेजें...', तनाव के बीच ट्रंप ने चीन-ब्रिटेन सहित दुनिया के कई देशों को क्यों भेजा संदेश?

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. उनका कहना है कि हर देश को मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलावाने में मदद करनी चाहिए...

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Ashutosh Rai

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित बनाए रखने के लिए कई देश अमेरिका के साथ मिलकर युद्धपोत तैनात करेंगे. ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन समेत वे सभी देश जो इस समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं, उन्हें वहां अपने युद्धपोत भेजने चाहिए.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिया बयान

अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की 100 प्रतिशत सैन्य क्षमता को नष्ट कर दिया है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि बुरी तरह पराजित होने के बावजूद ईरान ड्रोन, समुद्री बारूदी सुरंगों या कम दूरी की मिसाइलों से इस जलमार्ग में छोटे हमले कर सकता है, जो जहाजरानी के लिए खतरा बन सकते हैं.

तटरेखा पर बमबारी जारी रहेगाा

ट्रंप ने कहा, "उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश जो इस कृत्रिम बाधा से प्रभावित हैं. वहां जहाज भेजेंगे ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य एक ऐसे राष्ट्र के लिए खतरा न बना रहे जिसका पूरी तरह से सफाया हो चुका है". उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक यह मिशन पूरा नहीं हो जाता, अमेरिकी सेना तटरेखा पर बमबारी जारी रखेगी और ईरानी नौकाओं व जहाजों को निशाना बनाती रहेगी. ट्रंप ने जोर देकर कहा, "किसी न किसी तरह, हम जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला, सुरक्षित और स्वतंत्र बना देंगे".

ईरान युद्ध

गौरतलब है कि ईरान ने 1 मार्च से होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है. यह कदम 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त हमले के बाद उठाया गया, जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत 1200 से अधिक लोग मारे गए थे. इसके जवाब में तेहरान ने इजरायल, जॉर्डन, इराक और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं.

मिडिल ईस्ट में तनाव

इस बीच मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है. युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है. कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका भी जताई जा रही है.