नई दिल्ली: मध्य पूर्व की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद छिड़ गया है. ईरान के इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड के पूर्व वरिष्ठ कमांडर हुसैन कनानी मोघदम ने सनसनीखेज दावा किया है कि सऊदी अरब के पास परमाणु हथियार मौजूद हैं. अमेरिकी पत्रकार रिक सांचेज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि यह बात सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि अमेरिका और इजरायल भी अच्छी तरह जानते हैं. पूर्व कमांडर ने ईरानी खुफिया एजेंसी के हवाले से बताया कि सऊदी दुनिया को दिखाता है कि उसके पास न्यूक्लियर बम नहीं हैं, लेकिन हकीकत अलग है.
हुसैन कनानी मोघदम ने कहा कि सऊदी अरब के परमाणु हथियारों पर अमेरिका और इजरायल के साथ लगातार बातचीत होती रही है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका सऊदी को इजरायल की मान्यता देने के बदले उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को स्वीकार करने के लिए तैयार था. पूर्व कमांडर का कहना है कि तीनों देश इस मुद्दे पर गुप्त चर्चा में शामिल रहे हैं, लेकिन सऊदी ने इसे सार्वजनिक कभी नहीं
किया.
अब्राहम अकॉर्ड की बातचीत के दौरान सऊदी अरब को परमाणु हथियार रखने की छूट देने का प्रस्ताव रखा गया था. हुसैन कनानी मोघदम ने ईरानी इंटेलिजेंस के आधार पर बताया कि इजरायल और अमेरिका ने सऊदी को यह रियायत देने के लिए कहा था कि वह इजरायल को मान्यता दे. हालांकि गाजा युद्ध के बाद ये वार्ताएं रुक गईं और समझौता नहीं हो सका.
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"We have solid intelligence Saudi Arabia has a NUCLEAR BOMB, and the U.S. and Israel are fully aware of it." - former high-ranking IRGC commander Hussein Kanani Moghadam drops a geopolitical bombshell.
— Rick Sanchez (@RickSanchezTV) February 9, 2026
We dive into the explosive claim, covert Mossad-fueled unrest, and the… https://t.co/7vJ7jRap5b pic.twitter.com/DlAcEXVQFb
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कई बार परमाणु हथियार विकसित करने की इच्छा जाहिर की है. आधिकारिक तौर पर रियाद के पास न्यूक्लियर बम नहीं हैं, लेकिन पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौते में एक देश पर हमले को दोनों पर हमला माना गया है. ईरानी पूर्व कमांडर का दावा है कि सऊदी ने परमाणु ताकत हासिल कर ली है, लेकिन इसे छिपाकर रखा है.
यह दावा मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है. ईरान और सऊदी के बीच पहले से तनाव है. अगर सऊदी के पास परमाणु हथियार साबित होते हैं, तो ईरान का अपना परमाणु कार्यक्रम और मजबूत होने का दबाव बढ़ेगा. फिलहाल सऊदी अरब ने इस दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है.