अरब देशों में टकराव तेज, यमन में सऊदी की एयर स्ट्राइक से UAE समर्थित गुट के 7 लोगों की मौत

दक्षिणी यमन में सऊदी अरब और यूएई समर्थित गुटों के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है. सऊदी हवाई हमलों में सात लोगों की मौत के बाद अरब देशों के रिश्तों में तनाव और बढ़ गया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: यमन में वर्षों से जारी गृहयुद्ध के बीच अब सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. दक्षिणी यमन में सऊदी अरब ने यूएई समर्थित अलगाववादी संगठन सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल के ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं. इन हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत हुई है. यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब यमनी सरकार ने यूएई को देश छोड़ने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है.

शुक्रवार को सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी यमन के हदरामौत इलाके में एसटीसी के अल-खसाह कैंप को निशाना बनाया. एसटीसी के स्थानीय प्रमुख मोहम्मद अब्दुलमलिक के अनुसार सात हवाई हमले किए गए, जिनमें सात लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक घायल हुए. यह हमला ऐसे समय हुआ, जब सऊदी समर्थित नेशनल शील्ड फोर्स इलाके में सैन्य ठिकानों पर नियंत्रण की कोशिश कर रही थी.

यमन में दो सहयोगी आमने-सामने

यमन के मौजूदा संकट में सऊदी अरब राष्ट्रपति राशद अल-अलीमी की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है. वहीं यूएई दक्षिणी यमन के अलगाववादी संगठन एसटीसी के साथ खड़ा है. दिसंबर में एसटीसी ने हदरामौत और सऊदी सीमा से सटे महरा प्रांत के बड़े हिस्सों पर कब्जा कर लिया था. रियाद इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मानता है.

24 घंटे का अल्टीमेटम और बढ़ता तनाव

सऊदी हवाई हमलों से पहले यमनी सरकार ने यूएई को देश से अपनी सैन्य और राजनीतिक मौजूदगी खत्म करने के लिए 24 घंटे का समय दिया था. इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ गए. सऊदी अरब के यमन स्थित राजदूत ने आरोप लगाया कि एसटीसी ने अदन में सऊदी मध्यस्थता प्रतिनिधिमंडल को उतरने से रोक दिया. इससे बातचीत की संभावनाओं को गहरा झटका लगा.

एसटीसी के आरोप और कड़ा जवाब

एसटीसी समर्थित सदर्न शील्ड फोर्स के प्रवक्ता मोहम्मद अल-नकीब ने सऊदी अरब पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि सऊदी सेना मुस्लिम ब्रदरहुड और अल-कायदा से जुड़े गुटों का इस्तेमाल कर रही है. सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में उन्होंने इस टकराव की तुलना 1994 के यमन गृहयुद्ध से की और कहा कि इस बार लड़ाई सऊदी हवाई हमलों की आड़ में लड़ी जा रही है.

सऊदी-यूएई रिश्तों की जटिल पृष्ठभूमि

2015 में यूएई सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हुआ था, जिसका मकसद ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को सत्ता से दूर रखना था. लेकिन समय के साथ यूएई ने दक्षिणी यमन में अपनी अलग रणनीति अपनाई. उसने स्थानीय मिलिशिया और एसटीसी के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाया. यही अलग-अलग हित अब दोनों अरब देशों को आमने-सामने ले आए हैं और यमन एक नए टकराव का मैदान बनता जा रहा है.