सैटेलाइट तस्वीरों ने खोली ईरान-अमेरिका संघर्ष की पोल, दोनों देशों को हुआ भारी नुकसान

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों ने दोनों पक्षों के हमलों से हुए नुकसान की तस्वीर साफ कर दी है.

X (@EGYOSINT)
Shanu Sharma

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से विध्वंसकारी युद्ध की शुरुआत हो चुकी है. दोनों देश एक दूसरे के सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे है. अमेरिका द्वारा ईरान पर ताबतोड़ बम बरसाए जा रहे हैं, वहीं ईरान मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने में लगा है. 

दोनों देशों में जारी युद्ध के बीच कुछ सैटेलाइट तस्वीर सामने आई है. जिसमें युद्ध के कारण हुए नुकसान का पता चल रहा है. हालांकि सामने आ रही तस्वीरें कम रिजोल्यूशन की है, जिसकी वह से क्षति साफ नजर नहीं आ रही, लेकिन काफी इसे देख कर हुए नुकसान को काफी हद तक समझा जा सकता है. हालांकि अभी इन दावों की जांच की जा रही है. 

अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिका अब इस युद्ध में कोई भी रहम नहीं कर रहा है. ईरान के अलग-अलग शहरों में लगातार हमले हो रहे हैं. वहीं ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई के तहत खाड़ी के कई देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है. रिपोर्ट के अनुसार ईरान द्वारा किए गए हमले में जॉर्डन स्थित प्रिंस हसन एयर बेस पर मौजूद एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन हैंगर पूरी तरह नष्ट हो गया.


वहीं कतर के अल उदैद एयर बेस के एक हैंगर को भी नुकसान पहुंचा. इसके अलावा बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय के पास स्थित एक स्टोरेज सुविधा भी हमले की चपेट में आई. कुवैत में पुराने संयुक्त राष्ट्र बेस पर आग लगने की घटना भी सामने आई. 

अमेरिकी ठिकानों की सुरक्षा पर उठे सवाल

दोनों देशों के बीच चल रहे इस जंग के बीच सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में कई अमेरिकी सैन्य ढांचों के क्षतिग्रस्त होने, हैंगर टूटने और उपकरण नष्ट होने के संकेत मिले हैं. हालांकि अमेरिका अभी भी अपने नुकसान को नहीं मान रहा है और इसे एक सीमित नुकसान बता रहा है. अब सामने आ रही तस्वीरों ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि दूसरी तरफ इन तस्वीरों में ईरान को पहुंचे नुकसान का भी पता चल रहा है.

परमाणु बिजली संयंत्र परिसर पर हमला

सैटेलाइट तस्वीरों में बूशहर परमाणु बिजली संयंत्र परिसर के भीतर एक इमारत पूरी तरह ध्वस्त दिखाई दे रही है. यह भवन अतिरिक्त परमाणु रिएक्टरों के निर्माण क्षेत्र का हिस्सा बताया जा रहा है और मुख्य संचालित रिएक्टर के बेहद करीब स्थित था. विश्लेषकों ने इन तस्वीरों का अध्ययन करते हुए आशंका जताई है कि यदि मुख्य परमाणु रिएक्टर को नुकसान पहुंचता तो इसका असर पूरे खाड़ी क्षेत्र तक फैल सकता था. हालांकि अमेरिका का कहना है कि उसके हमले केवल सैन्य ठिकानों, मिसाइल स्थलों, ड्रोन सुविधाओं और कमांड सेंटर तक सीमित थे. वहीं ईरान का दावा है कि बूशहर प्रांत में नागरिक ढांचे, मछली पकड़ने के घाट और अन्य सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं. ऐसे में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरें दोनों पक्षों के दावों की आंशिक पुष्टि भी करती हैं और कई सवाल भी खड़े करती हैं.