रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार (19 दिसंबर) को इजरायल से "सीरिया के क्षेत्र" से अपनी सेना हटाने का आग्रह किया. दरअसल, पुतिन ने अपने वार्षिक वर्ष के अंत में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हमें उम्मीद है कि इजरायल किसी समय सीरिया के क्षेत्र को छोड़ देगा. लेकिन अब वह अतिरिक्त सैनिकों को ला रहा है. जो दर्शाता है कि तेल अवीव युद्धग्रस्त देश में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने का इरादा रखता है.
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को कहा कि इजरायल सीरिया में और अधिक सैनिक भेज रहा है, जो दर्शाता है कि न केवल वे सीरिया छोड़ने वाले नहीं हैं, बल्कि वे वहां अपनी सेना को मजबूत करने जा रहे हैं. पुतिन ने मॉस्को में अपने वार्षिक समाचार सम्मेलन और कॉल-इन शो के दौरान अनादोलु से एक सवाल के जवाब में कहा कि रूस सीरिया के किसी भी क्षेत्र पर कब्ज़ा करने की निंदा करता है, उन्होंने गाजा पट्टी में इजरायल की कार्रवाइयों को "केवल निंदनीय" बताया.
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— Open Source Intel (@Osint613) December 19, 2024
Putin calls on Israel to pull out its troops from Syrian territory. pic.twitter.com/A6kaIVOsqB
सीरिया में हो रही घटनाओं का "मुख्य लाभार्थी" इजरायल
पुतिन का मानना है कि सीरिया में हो रही घटनाओं का "मुख्य लाभार्थी" इजरायल है. रूसी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वह तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के साथ "लगातार" संपर्क में हैं. यह दर्शाता है कि हालांकि उन्हें याद नहीं है कि उनकी नई बातचीत कब हुई थी, लेकिन उन्होंने मध्य पूर्व की स्थिति पर चर्चा की.
फिलिस्तीन का निर्माण आज तक नहीं हुआ- पुतिन
पुतिन ने आगे कहा कि मध्य पूर्व में हो रहे घटनाक्रमों के प्रति एर्दोगन का रवैया सभी को अच्छी तरह से पता है, जैसा कि रूस की स्थिति है, जो मानती है कि फिलिस्तीनी मुद्दे को केवल "इसके होने के कारणों को दूर करके" हल किया जा सकता है. इस मामले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अपनाए गए निर्णयों को याद करते हुए पुतिन ने कहा, "इज़रायल का निर्माण हो चुका है; वास्तव में, फिलिस्तीन का निर्माण आज तक नहीं हुआ है. यही पूरी समस्या है.