क्या रूस के हाथों से निकल रहा क्रीमिया? यूक्रेन कैसे पलट रहा बाजी, पुतिन की हार से भारत पर क्या होगा असर?
रूस-यूक्रेन युद्ध के चार साल बाद भी लड़ाई निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंची है. क्रीमिया को लेकर बढ़ते हमले और बदलते सैन्य समीकरणों के बीच विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आने वाले समय में इस मोर्चे की स्थिति पूरे युद्ध की दिशा तय कर सकती है, जिसका असर वैश्विक राजनीति और भारत पर भी पड़ सकता है.
वैश्विक मंच पर अमेरिका और रूस जैसे देशों को महाशक्तिशाली देशों में गिना जाता है. हालांकि पिछले कुछ सालों से चल रहे युद्ध के दौर ने इस छवि को कहीं न कहीं धूमिल की है. एक ओर अमेरिका जैसी महाशक्ति को ईरान जैसे छोटे देश से लंबी लड़ाई लड़नी पड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ रूस, यूक्रेन के खिलाफ निर्णायक बढ़त हासिल करने में नाकाम नजर आ रही है.
रूस ने जब 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन पर हमला किया था, तब कई विदेश नीति जानकारों ने दावा किया था कि यह युद्ध महज कुछ दिनों का है. उन्होंने इस युद्ध में यूक्रेन की हार तय बताई थी. चार साल से जारी इस युद्ध ने अब उन सभी जानकारों की भविष्यवाणी को गलत कर दिया है. समय ऐसा आ चुका है कि रूस ने भी अपनी स्थिति को स्वीकार करना शुरू कर दिया है.
चार साल से जंग जारी
यूक्रेन और रूस के बीच पिछले चार सालों से जंग जारी है. हालांकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इन चार वर्षों में पहली बार माना है कि उनका देश अभी मुश्किल दौर से गुजर रहा है. अमेरिका और यूरोप के समर्थन के बावजूद यूक्रेन ने अपनी रणनीति और सैन्य कौशल के दम पर भी रूस को भारी नुकसान पहुंचाया है. एक ओर रूस अपने बड़े-बड़े हथियारों का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ कर रहा है, वहीं यूक्रेन सीमित संसाधनों के बावजूद रूस को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है. दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध का सबसे रणनीतिक पॉइंट क्रीमिया प्रायद्वीप है. जिसे राष्ट्रपति पुतिन ने 2014 में रूस में विलय किया था. आपको बता दें कि यह जमीन चारों तरफ पानी से घिरी हुई है, लेकिन लगभग 7 किमी की एक जमीनी पट्टी इसे यूक्रेन से जोड़ती है.
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क्रीमिया पर जीत पाने की कोशिश में यूक्रेन
क्रीमिया तक पहुंचने के लिए यूक्रेन के पास तीन विकल्प हैं. पहला केर्च ब्रिज, जिसे 2014 में कब्जे के बाद बनाया गया था. लेकिन इस ब्रिज पर यूक्रेन ने कई हमले किए, जिसके कारण रूस ने यहां से आवाजाही कम कर दी है. वहीं दूसरा रास्ता रूस के कब्जे वाले यूक्रेन से जुड़ा है. लेकिन रूस यहां पर भी लगातार हमले कर रहा है. इन दो रास्तों के अलावा एक समुद्री रास्ता भी है. लेकिन यूक्रेन इस रास्ते पर भी लगातार हमले कर रहा है.
इन हमलों की वजह से रूस का लिंक टूटने लगा है और क्रीमिया में तेल की किल्लत हो गई है. क्रीमिया के इन हालात को यूक्रेन के पक्ष में माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यूक्रेन यहां लगातार हमले करता है तो लोग यहां से विस्थापित हो जाएंगे और इसे रूस की हार मानी जाएगी. क्योंकि जैसे ही रूस वहां से अपना कंट्रोल खोता है यूक्रेन इस पर कब्जा करने की कोशिश करेगा. यूक्रेन इसे सच करने के लिए लगातार क्रीमिया पर हमला भी कर रहा है. इतना ही नहीं यूक्रेन ने दावा किया है कि उसने युद्ध में रूस को कहीं अधिक नुकसान पहुंचाया है.
भारत और दुनिया पर क्या होगा असर?
अब सवाल यह उठता है कि अगर रूस इस जंग में क्रीमिया को खो देता है तो क्या होगा और रूस की हार का भारत पर कितना असर पड़ेगा? रूस के इस जंग में हारने से दुनिया में साफ संदेश जाएगा कि मजबूत होने से ज्यादा जरूरी शक्ति का सही इस्तेमाल करना होता है. ऐसे में चीन और ताइवान की स्थिति पर लोगों के विचार बदलेंगे. इसके अलावा हार की स्थिति में परमाणु हमले का भी खतरा नजर आ रहा है. अगर रूस हमला करता है तो फिर वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदल सकती है. वहीं रूस की हार भारत के लिए भी नुकसानदेह हो सकती है. क्योंकि भारत अपनी जरूरत का तेल और रक्षा उपकरण रूस से खरीदता है, अगर रूस के हालात खराब होते हैं तो भारत को नुकसान उठाना पड़ सकता है.