निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी से भड़के रूस और ईरान, जानिए दूसरे देशों ने इस हमले पर क्या दी प्रतिक्रिया?

शनिवार को वेनेजुएला में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'सर्जिकल स्ट्राइक' ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है.

X
Ashutosh Rai

नई दिल्ली: शनिवार को वेनेजुएला में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'सर्जिकल स्ट्राइक' ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है. निकोलस मादुरो और उनके परिवार की गिरफ्तारी के दावे के बाद रूस, ईरान और क्यूबा जैसे देशों ने अमेरिका के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. वर्ल्ड स्टेज पर इस हमले को संप्रभुता का उल्लंघन (Violation of Sovereignty) बताया जा रहा है. वहीं कई लोगों और विशेषज्ञों कर माने तो यह समय तीसरे विश्व युद्ध की आहट.

रूस ने दी चेतावनी

रूसी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की इस आक्रमक अंदाज की कड़ी निंदा की है. रूस ने स्पष्ट किया कि किसी भी बाहरी सैन्य हस्तक्षेप के बिना वेनेजुएला को अपने फैसले लेने का अधिकार होना चाहिए. मॉस्को ने तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया है, ताकि दक्षिण अमेरिका में कोई बड़ा युद्ध न छिड़ जाए.

ईरान और क्यूबा का कड़ा रुख

ईरान ने इस हमले को क्षेत्रीय अखंडता का घोर उल्लंघन करार दिया है. वहीं, क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने इसे एक आपराधिक हमला बताते हुए पूरी दुनिया से तत्काल प्रतिक्रिया की मांग की है. क्यूबा का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून की धज्जियां उड़ाने जैसा है.

कोलंबिया ने सीमा पर भेजी सेना

पड़ोसी देश कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने हमले के तुरंत बाद वेनेजुएला सीमा पर सैन्य बलों की तैनाती का आदेश दे दिया है. उन्होंने 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि शांति और मानवीय गरिमा किसी भी सैन्य टकराव से ऊपर है. कोलंबिया का यह कदम क्षेत्र में बढ़ती सैन्य हलचल का संकेत है.

स्पेन की 'शांति' की अपील

यूरोपीय देश स्पेन ने संतुलित रुख अपनाते हुए दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है. स्पेन ने वेनेजुएला संकट के शांतिपूर्ण समाधान के लिए खुद को एक 'मध्यस्थ' के रूप में पेश किया है.

कौन हैं निकोलस मादुरो?

  1. 1962 में काराकास में जन्मे, मादुरो ने अपने कामकाजी जीवन की शुरुआत एक बस ड्राइवर और मेट्रो यूनियन नेता के रूप में की.
  2. ह्यूगो शावेज के करीबी सहयोगी के रूप में वेनेजुएला के वामपंथी राजनीतिक आंदोलन में आगे बढ़े.
  3. 2006 से 2013 तक विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया, ALBA और CELAC जैसे क्षेत्रीय गुटों को स्थापित करने में मदद की.
  4. 2012 में उपराष्ट्रपति नियुक्त हुए और 2013 में शावेज की मृत्यु के बाद अंतरिम राष्ट्रपति बने.
  5. 2013 में एक कड़े मुकाबले वाले चुनाव में जीत हासिल की और धोखाधड़ी के बार-बार आरोपों के बीच सत्ता में बने रहे.
  6. उनके शासनकाल में प्रतिबंध, आर्थिक पतन, बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय अलगाव देखा गया है.